छत्तीसगढ

शिक्षकों के धैर्य और संतुलन का गहरा प्रभाव बच्चों पर पड़ता है: प्रभा दुबे

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा आज दो सत्रों में शासकीय शिक्षक शिक्षण महाविद्यालय के एमएड व बीएड के छात्र-छात्राओं को ‘मोर मयारू गुरुजी’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में बच्चों के मानसिक विकास पर शिक्षकों के पड़ने वाले प्रभाव विषय पर उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापकों, एम.एड. एवं बी.एड. के प्रशिक्षार्थियों को सम्बोधित करते हुए छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती प्रभा दुबे ने कहा कि शिक्षकों के धैर्य और संतुलन का गहरा प्रभाव बच्चों पर पड़ता है, बच्चों के व्यवहार को पढ़ना सीखेंगे तो उन्हें गढ़ना स्वयं सीख जाएंगे।

उन्होंने आगे कहा कि , आज के इस युग मे बच्चे 80 प्रतिशत चीजें देखकर सीखतें हैं। बच्चे देश का भविष्य हैं हमें उन्हें शैक्षणिक ज्ञान के साथ ही नैतिक शिक्षा देनी ही होगी बच्चों को अनुकूल वातावरण देने के लिए उनके साथ चाइल्ड फ्रेंडली होना होगा, तब हम बच्चों को श्रेष्ठ नागरिक बना पायेंगे। उन्होंने गुरू के विषय में कहा कि जिनकी वाणी से स्वर जन्में, शब्दों को सच्चे अर्थ में लें, जिससे भाषा का मन महके, जिनसे छंदों के रूप खिलेे हम उसी आत्म ज्ञानी, बलिदानी को ही आदर्श गुरू कहते हैं की परिभाषा में समझाया।

अधिकार व कर्तव्यों की जानकारी देना शिक्षकों की जिम्मेदारी: प्रतीक खरे

कार्यशाला में आयोग के सचिव प्रतीक खरे ने बाल अधिकारों के संबंध में चर्चा की और शिक्षकों के व्यवहार का बच्चों के मानसिक विकास पर पड़ने वाले प्रभाव पर अपने विचार रखे। उन्होंने खेल के माध्यम से बताया कि एक लंबे समय बच्चे शिक्षकों के संपर्क में रहते हैं। बच्चों को शिक्षा के साथ ही उनके अधिकार और कर्तव्यों की जानकारी देना शिक्षकों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आज बच्चों को अनुशासन के साथ ही व्यवहारिक ज्ञान की अधिक आवश्यकता है। इसके साथ ही आयोग के सदस्य सुश्री टी.आर. श्यामा, श्रीमती इंदिरा जैन ने भी कार्यशाला को सम्बोधित किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापकगण एवं सौ से अधिक की संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

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