छत्तीसगढ

समस्याओं के निराकरण हेतु महिला निःसंकोच आयोग में ऑनलाइन या पत्र के माध्यम से करे आवेदन: डॉ किरणमयी नायक

महिलाओं के उत्पीड़न एवं प्रताड़ना से संबंधित प्रकरणों पर होगी त्वरित कार्यवाही

रायपुर, 19 अगस्त। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष डॉ किरणमयी नायक और सदस्य श्रीमती खिलेश्वरी किरण ने आज रायपुर जिले के पंजीकृत प्रकरणों की सुनवाई की।आयोग द्वारा प्रत्येक प्रकरण के लिए सुनवाई का समय निर्धारित किया गया था।नोवेल कोरोना वायरस के संक्रमण के नियंत्रण एवं रोकथाम के लिए केंद्र और राज्य शासन द्वारा जारी निर्देशो का पालन करते हुए सुनवाई की गई।
आज प्रस्तुत प्रकरणों में एक प्रकरण में आयोग के समक्ष पति द्वारा गुमराह कर अकेला छोड़ने पर आवेदिका ने इच्छा मृत्यु की मांग की । आवेदिका ने स्वयं के साथ निरंतर मानसिक एवं घरेलू हिंसा होने की बात आयोग के अध्यक्ष के सामने रखी। आयोग के न्यायपीठ ने प्रकरण पर तत्काल संज्ञान लिया तथा अनावेदक जो कि आवेदिका का पति है, को तत्काल सुनवाई स्थल पर उपस्थित कराया गया। प्रकरण पर सुनवाई कर परीक्षण किया गया तथा अन्य संबंधित पक्षकारों को भी आगामी सुनवाई में उपस्थित होने हेतु निर्देशित किया गया । आवेदिका की मनोदशा को देखते हुए, उसे सखी वन स्टाॅप सेन्टर में अगली सुनवाई तक के लिए भेजा गया है।

प्रकरणों की सुनवाई करते हुए डॉ नायक ने कहा कि महिलाओं के उत्पीड़न एवं प्रताड़ना से संबंधित समस्याओं पर आयोग त्वरित कार्यवाही हेतु प्रतिबद्ध है। महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना से संबंधित बहुत से प्रकरण घटित होते हैं। महिलाएं संकोच तथा शर्म के कारण अधिकांशतः इन अत्याचारों को सहन करती रहती है। प्रताड़ित एवं समस्या ग्रस्त महिलाएं राज्य महिला आयोग में निःसंकोच अपनी शिकायत आॅनलाईन अथवा पत्र के माध्यम से कर सकती है।यह देखा जा रहा है कि आयोग में पुरूषों के द्वारा भी आवेदन किये जा रहे है तथा ज्यादात्तर आवेदन ऐसे होते जिसमें संबंधित महिला के द्वारा प्रताड़ना की शिकायत किये जाने की संभावना होती है। पुरूषों के द्वारा अग्रिम रूप से अपना पक्ष रखे जाने हेतु आवेदन किये जाते है। आयोग द्वारा ऐसे आवेदन को संज्ञान में नहीं लिया जाता है।

आज की सुनवाई में 20 प्रकरण रखे गये थे, जिसमे 14 प्रकरणों में ही पक्षकार उपस्थित हुए तथा 04 प्रकरणों का सुनवाई पश्चात् निराकरण किया गया।आज रखे गए प्रकरण मुख्यतः पति-पत्नि विवाद, दैहिक शोषण, मारपीट, प्रताड़ना, दहेज प्रताड़ना, कार्यस्थल पर प्रताड़ना, घरेलू हिंसा से संबंधित थे।

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