नई शिक्षा नीति के आलोक में हम सब आत्मनिर्भर व स्वाभिमानी राष्ट्र के निर्माण के लिए संकल्पित हों : पुरोहित

बागबाहर, 16 अगस्त। सरस्वती शिक्षा संस्थान, छत्तीसगढ़ के महासमुंद ज़िला प्रतिनिधि व स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर संचालन समिति के अध्यक्ष अनिल पुरोहित ने केंद्र सरकार द्वारा घोषित राष्ट्रीय शिक्षा नीति को देश के शैक्षिक जगत में क्रांतिकारी व युगानुकूल परिवर्तन का वाहक बताते हुए कहा है कि यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति समग्र, एकात्म, सर्वसमावेशी तथा उच्च गुणवत्तायुक्त शिक्षा की दिशा में सशक्त कदम होने के साथ-साथ 21वीं शताब्दी के लिए आवश्यक कौशलों तथा मूल्याधारित, मनुष्य–निर्मात्री शिक्षा पद्धति को लागू करने का मार्ग भी प्रशस्त करेगी। श्री पुरोहित यहाँ सशिमं प्रांगण में भारतीय स्वतंत्रता की 73वीं वर्षगाँठ के मौके पर धवजारोहण के पश्चात विद्यालय के सभागार में आहूत कार्यक्रम को अध्यक्षीय आसंदी से संबोधित कर रहे थे।
विदित रहे, 74वें स्वाधीनता दिवस समारोह के अवसर पर विद्यालय संचालन समिति के सचिव व व्यवस्थापक जोगेंद्र सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में धवजारोहण किया और अपने संबोधन में उपस्थित आचार्यों, दीदीयों, पालकों, पूर्व छात्रों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि समिति के सहसचिव रामजी तिवारी थे। कोरोना संक्रमण को दृष्टिगत रखते हुए इस बार कार्यक्रमों में विद्यार्थियों की सहभागिता नहीं रखी गई थी। कोविड-19 की गाइडलाइन का पूरी तरह पालन करते हुए स्वाधीनता दिवस समारोह की संरचना की गई थी, जिसमें उपस्थित सभी लोगों ने मास्क धारण कर और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री पुरोहित ने शिक्षा नीति के सभी बिंदुओं की चर्चा करते हुए कहा कि शिक्षा नीति का जो प्रारूप सामने आया है, उससे सपष्ट है कि अतीत के अनुभवों से सीख लेकर, वर्तमान की चुनौतियों को समझ कर तथा भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रख कर इसको तैयार किया गया है। श्री पुरोहित ने कहा कि स्वाधीनता दिवस का आयोजन महज़ रस्म-अदायगी के बजाय संकल्प-पर्व के रूप में होना चाहिए। हमारे सभी राष्ट्रीय, धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक पर्वों में निहित संदेशों को आत्मसात कर तदनुरूप समाज-निर्माण में संकल्पित होकर जुटना आज समय की आवश्यकता है। जयंती के अवसर पर महर्षि योगी अरविंद को नमन व स्मरण कर कार्यक्रम अध्यक्ष ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में धारा 370 व अनुच्चेद 35(ए) की समाप्ति विभाजन को खत्म कर अखंड भारत के हमारे संजोए गए उस स्वप्न को साकार करने की दिशा में एक अहम पड़ाव है, जिसकी कल्पना महर्षि अरविंद ने संजोई थी। श्री राम मंदिर के निर्माण को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अवधारणा की चैतन्य अभिव्यक्ति बताते हुए श्री पुरोहित ने कहा कि नई शिक्षा नीति के आलोक में हम सब आत्मनिर्भर व स्वाभिमानी राष्ट्र के निर्माण के लिए संकल्पित हों।
इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ ध्वजारोहण, राष्ट्रगान, भारतमाता के पूजन अर्चन व महर्षि अरविंद के पुण्य-समरण से हुआ। कार्यक्रम में विद्यालय के प्राचार्य त्रिलोचन साहू ने अतिथि परिचय दिया। विद्यालय के आचार्यों-दीदीजी ने भी इस मौक़े पर अपने विचार व गीत आदि प्रस्तुत किए। इस अवसर पर संचालन समिति के उपाध्यक्ष मनसुख परमार, कोषाध्यक्ष राहुल अग्रवाल सहित पालक परिषद, पूर्व छात्र परिषद के सदस्य व विद्यालय परिवार उपस्थित था। कार्यक्रम का संचालन दीदी नीलू साहू व ज्योति ओझा ने किया। आभार प्रदर्शन प्रधानाचार्य गोपाल सोनवानी ने किया। वंदेमातरम के सामूहिक सस्वर गायन के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ।