नाइजीरिया के नागरिक ने महिला के अकाउंट से पार किया 7 लाख से अधिक राशि

रायपुर: फेसबुक में फर्जी आईडी बनाकर महिला से ठगी का मामला सामने आया है. फेसबुक और वॉट्सएप के जरिये चैट कर आरोपियों ने धीरे-धीरे महिला को विश्वास में लेकर उनका मोबाइल नंबर भी ले लिया. आरोपियों ने अपने आप को डॉक्टर बताकर पीड़िता का इलाज करने, गिफ्ट और पैसे भेजने के नाम पर ठगी की वारदात को अंजाम दिया है.
एक महिला से लाखों रुपये की ठगी को अंजाम दिया है.
महिला से 7 लाख रुपये की ठगी
आरोपियों ने 5 बार में पीड़िता के अकाउंट से 7 लाख 53 हजार रुपये साफ कर दिए। आरोपियों ने अलग-अलग खातों के जरिये इस वारदात को अंजाम दिया है। 7 नवंबर को पीड़ित महिला ने रायपुर एसएसपी अजय यादव से इसकी शिकायत की थी। जिसके बाद खमतराई थाने में मामले को लेकर अपराध दर्ज किया गया था। जिसके बाद रायपुर से पुलिस की टीम 8 नवंबर को दिल्ली भेजी गई। रायपुर पुलिस और साइबर टीम रविवार की देर रात नाइजीरियन ठगों को रिमांड पर लेकर दिल्ली से रायपुर लेकर आई।
बिना वीजा के रह रहे थे आरोपी
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 4 मोबाइल, 3 एटीएम कार्ड और 5 पेटीएम कार्ड भी जब्त किया है. दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर पुलिस इनसे आगे की पूछताछ कर रही है। पुलिस के मुताबिक दोनों आरोपियों ने मिलकर लगभग 50 से ज्यादा ठगी की वारदातों को अंजाम दिया है। इसकी भी जांच की जा रही है। गिरफ्तार आरोपी मूलत: नाइजीरिया के नागरिक हैं। रायपुर पुलिस ने दोनों आरोपियों को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। पुलिस को पता चला है कि दोनों विदेशी नागरिक बिना वीजा के भारत में रह रहे थे. दोनों के खिलाफ फॉरेन एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। पकड़े गए दोनों आरोपियों के नाम क्रिस्टोफर और इडुची है।

आरोपियों से जब्त किए गए कार्ड
सोशल मीडिया के जरिए होती है ठगी
जानकारों की मानें तो इंटरनेट और सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरीके से ठगी की जाती है। जानकारों का कहना है कि साइबर अपराधी सबसे ज्यादा सोशल मीडिया जिसमें वर्तमान समय में फेसबुक ज्यादा प्रचलन में है, इसे हैक करते हैं। कई बार बैंक मैनेजर बनकर या केवाईसी एजेंट बनकर आम जनता को ओटीपी साझा करने के लिए कहते हैं।

आरोपियों से बरामद किया गया सामान
लिंक के जरिए होती है ठगी
अभी त्योहारी सीजन होने के कारण लोगों ने ऑनलाइन शॉपिंग भी की है। इसके जरिए भी ठग इस तरह की वारदातों को अंजाम देते हैं। साइबर अपराधी कुछ ऐसे बॉक्स भी डिलवर कराते हैं, जिसमें एक स्क्रैच कार्ड होता है। वे उसे स्क्रेच करने के बाद जो भी अमाउंट दिखता है उसे वे उनके द्वारा दिए गए नंबर पर कॉल करके बताने के लिए कहते हैं या फिर लॉटरी, फ्री रिचार्ज या केबीसी के नाम पर लालच देकर ठग कॉल करते हैं या लिंक भेजते हैं। जिससे ठगी होती है।
फर्जी होते हैं ऐसे लिंक
ज्यादातर लिंक फर्जी होते हैं। जिससे लोगों के फोन हैक जाते हैं। उसके बाद ठग बैंक का अकाउंट नंबर, डेट ऑफ बर्थ, एड्रेस जैसी जानकारियां हासिल करके ठगी करते हैं। ऐसी चीजों से बचना चाहिए और सतर्क रहना चाहिए।