छत्तीसगढ

बीरस खन्ना ने साबित किया परिश्रम व लगन ही ‘आसमां में सुराख करने’ की कुंजी है

पामगढ़। कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों…! इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है, महिला किसान बीरस खन्ना ने। दरअसल, हिर्री ग्राम पंचायत ब्लॉक पामगढ़ की महिला किसान बीरस खन्ना अपनी कठिन परिश्रम व लगन से वह कर दिखाया जो सपने में कोई सोच न सकें।
बीरस खन्ना के जज्बे और हौसले के आगे प्रकृति ने भी सिर झुका दिया। कश्मीर के जिस ठंडे वातावरण में उगने वाले सेव के वृक्ष को अपने घर की बाड़ी में न सिर्फ बोया बल्कि उसमें हरे हरे सेव फल उगाकर, प्रकृति को नतमस्तक कर दिया।
माना जाता है कि, प्रदेश का सबसे गर्म जिला जांजगीर चांपा का। वहां अमूमन तापमान 47-48 तक चली जाती है। ठंड के दिनों में तापमान गिरकर 20 डिग्री सेल्सियस तक नीचे गिर जाता है, ऐसे में ठंडे प्रदेश के जलवायु के अनुरूप उगने वाली सेब के पेड़ की कल्पना इस मौसम में नहीं किया जा सकता। 49 डिग्री सेल्सियस पर प्रयोग तौर में सेव के पौधे को लाकर जीवित रखकर उसे वृक्ष के रूप में तैयार करने का राष्ट्रीय नवचारी संस्था अहमदाबाद (भारत सरकार का उपकरण) से मिली चुनौती असंभव नहीं तो कठिन जरूर थी। बीरस ने इस चुनौती को स्वीकारा। उन्होंने 3 साल तक कठिन परिश्रम से पौधे को संतान की तरह सींचा। आज व्यस्क हो चुका इस पेड़ में हरे सेव लगा हुआ है। उसकी बाड़ी में दर्जन भर कई प्रकार के पेड़ लहलहा रहे हैं जिसमें कई तरह के मीठे रसभरी फल भी आये हैं।

गर्म प्रदेश के लिए प्रयोग के तौर पर मिला था लक्ष्य

राष्ट्रीय नवाचारी संस्था के मदद से 2015 में सेब का पौधा निशुल्क बांटा गया था और यह लक्ष्य रखा था कि यह इसे 49 डिग्री सेल्सियस वाले गर्म क्षेत्र में भी प्रयोग के तौर पर लगाया जाए। जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ तहसील के ग्राम हिर्री की महिला बिरस खन्ना के बेटे ने इस पौधे को लाकर अपनी माँ को दिया उसके बाद पौधे को लगाकर पहले वर्ष में उसे लगभग 5 फीट ऊंचाई तक बढ़ाया। दूसरे वर्ष में फूल और फल आया और इस तरह पिछले 4 वर्षो से फूलों के साथ करीबन 1 दर्जन से भी ज्यादा फल आया है। अभी पेड़ की ऊंचाई 12 से 13 फीट है और यह पूरी तरह हरा-भरा स्वस्थ है।

जैविक खेती से जुड़े प्रयोगों में है महारत

बिरस खन्ना एक महिलास्व सहायता समूह से भी जुड़ी हुई है जिसमें उनके द्वारा ग्राम के अन्य महिलाओं को घर की बाड़ी में घरेलू उपयोग हेतु साग सब्जी फल फूल हो जैविक तरीके से उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। साथ ही वह पिछले 5 वर्षों से एमबी खन्ना फाउंडेशन नामक एनजीओ का संचालन भी कर रहे हैं जिसका मुख्य उद्देश जैविक कृषि को प्रोत्साहन करना उसे बढ़ावा देना है वर्तमान में अपने घर की बाड़ी में सेव, जामुन, अमरूद, चीकू, कटहल, हल्दी अदरक, प्याज, एलोवेरा, सीताफल, अनार, पपीता, निंबू, अंगूर, आंवला, मूनगा इत्यादि गुणकारी फल फूल सब्जी लगे हैं जिसमें पूरी तरह से जैविक खाद कीट नियंत्रक का प्रयोग किया जाता है।इन तमाम चीजों का निर्माण कृषक द्वारा स्वयं ही अपने घर में तैयार किया जाता है।

बिरस के मजबूत हौसले ने परिवार को दिया सबल

पति की मृत्यु के बाद स्वयं को सलबा साबित करते हुए उन्होंने अपने हौसले से परिवार को सवरा। उनके बड़े बेटे बलवंत सिंह खन्ना रायपुर में रहकर सामाजिक कार्यो में सक्रिय एवं छत्तीसगढ़ सरकार के एक मंत्री के निजी मीडिया प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं। छोटे बेटे संबोध खरे इंडियन आर्मी में पदस्थ हैं। चार संतानों सहित अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए उन्होंने नवाचारी कृषि के क्षेत्र को चुना और इस दिशा में कार्य कर आर्थिक संबल प्राप्त किया।

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