Tendu Patta Fire Case : वन मंत्री केदार कश्यप का बड़ा एक्शन…! बीजापुर DFO हटाए गए…10 करोड़ नुकसान की होगी निष्पक्ष जांच

Tendu Patta Fire Case : वन मंत्री केदार कश्यप का बड़ा एक्शन…! बीजापुर DFO हटाए गए…10 करोड़ नुकसान की होगी निष्पक्ष जांच

रायपुर, 27 मई। Tendu Patta Fire Case : बीजापुर जिले में हुए तेंदूपत्ता अग्निकांड को लेकर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने बड़ा और सख्त प्रशासनिक एक्शन लिया है। वनवासियों और तेंदूपत्ता संग्राहकों की मेहनत की कमाई को भारी नुकसान पहुंचाने वाली इस घटना पर तत्काल संज्ञान लेते हुए बीजापुर के वनमंडलाधिकारी (DFO) रमेश कुमार जांगड़े को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। उन्हें प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय, रायपुर में संबद्ध किया गया है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में हुई इस कार्रवाई को सरकार का साफ संदेश माना जा रहा है कि आदिवासी और वनवासी हितों से किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

अनुभवी अधिकारी जाधव सागर रामचंद्र को मिली कमान

वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर तेंदूपत्ता संग्रहण और प्रबंधन में अनुभवी अधिकारी जाधव सागर रामचंद्र को बीजापुर का नया DFO नियुक्त किया गया है। वर्तमान में वे राज्य लघु वनोपज संघ में पदस्थ हैं और दंतेवाड़ा में उनके कार्यों को काफी प्रभावी माना जाता है। सरकार ने संवेदनशील बीजापुर जिले की जिम्मेदारी ऐसे अधिकारी को सौंपी है, जिसे तेंदूपत्ता प्रबंधन का व्यापक अनुभव है।

वन मंत्री केदार कश्यप ने साफ शब्दों में कहा कि तेंदूपत्ता केवल वन उपज नहीं बल्कि हजारों आदिवासी और वनवासी परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार है। उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी भी स्तर की लापरवाही को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

10 करोड़ से ज्यादा नुकसान का अनुमान

उल्लेखनीय है कि 25 मई 2026 को बीजापुर जिले के इटपाल स्थित एक निजी गोदाम में भीषण आग लग गई थी। आग में विभिन्न समितियों द्वारा संग्रहित तेंदूपत्ता जलकर पूरी तरह नष्ट हो गया। प्रारंभिक आकलन के मुताबिक इस अग्निकांड में करीब 10 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। फिलहाल वास्तविक नुकसान का भौतिक सत्यापन जारी है।

सुरक्षा व्यवस्था होगी और मजबूत

शासन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। जांच में गोदामीकरण प्रक्रिया, सुरक्षा मानकों का पालन, अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका और वित्तीय नुकसान जैसे सभी पहलुओं की समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।

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