रायपुर, 02 अगस्त। New Criminal Laws : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि वर्तमान समय की चुनौतियों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाए गए नए आपराधिक कानून भारत की न्याय व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन लेकर आए हैं। इनका उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि आम नागरिक को त्वरित, पारदर्शी, सुलभ और समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराना है।
राजधानी रायपुर में आयोजित ‘स्ट्रेंथिंग डिजिटल जस्टिस’ राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगभग 150 वर्ष पुराने औपनिवेशिक कानूनों के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू किए गए हैं, जिनकी मूल भावना नागरिक-केंद्रित न्याय व्यवस्था स्थापित करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुराने कानून उस समय बनाए गए थे, जब डिजिटल तकनीक, सीसीटीवी, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और आधुनिक फॉरेंसिक विज्ञान का विकास नहीं हुआ था। नए कानूनों में डिजिटल साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल चैट, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और वैज्ञानिक फॉरेंसिक जांच को कानूनी मान्यता देकर अपराध अनुसंधान और अभियोजन को अधिक प्रभावी बनाया गया है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की शाखा शुरू होने से अपराध अनुसंधान और न्यायिक प्रक्रिया को नई मजबूती मिलेगी। वहीं ई-साक्ष्य, ई-समन, न्याय श्रुति, सीसीटीएनएस और इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं से न्याय प्रणाली अधिक तेज, पारदर्शी और जवाबदेह बन रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीसीटीएनएस के माध्यम से देशभर के पुलिस थाने डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। छत्तीसगढ़ के सभी थाने ऑनलाइन मोड में कार्यरत हैं और अब तक 1 लाख 97 हजार 547 ऑनलाइन एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। नागरिकों को डिजिटल हस्ताक्षरित एफआईआर की प्रति भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने कहा कि आईसीजेएस के माध्यम से न्यायपालिका, पुलिस, अभियोजन, जेल और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच सुरक्षित डिजिटल समन्वय स्थापित हुआ है, जिससे सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान और न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आई है। साइबर अपराधों से निपटने के लिए राज्य में नौ नए साइबर थाने भी शुरू किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों के सतत प्रशिक्षण, तकनीकी क्षमता विकास और नियमित मॉनिटरिंग पर विशेष जोर दिया।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य की न्याय प्रणाली अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक और तकनीक आधारित बनेगी। उन्होंने कहा कि ई-साक्ष्य, ई-चालान, न्याय श्रुति और डिजिटल फॉरेंसिक्स जैसी व्यवस्थाएं नए कानूनों की मूल भावना को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि जून माह में जिला न्यायालयों में लगभग 9,910 मामलों तथा उच्च न्यायालय में 58 मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई। उन्होंने सभी हितधारकों से न्याय श्रुति प्लेटफॉर्म का अधिकाधिक उपयोग करने का आग्रह किया।
उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह कार्यशाला न्याय व्यवस्था के डिजिटलीकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम के क्रियान्वयन में तेजी लाई गई है। उन्होंने “वन डेटा, वन एंट्री” की अवधारणा, एफआईआर की मैनुअल प्रक्रिया समाप्त करने तथा ई-फॉरेंसिक, ई-साक्ष्य, न्याय श्रुति, सीसीटीएनएस, नेफिस, सीआरपीआई एप्लिकेशन और डीएनए सैंपलिंग जैसी आधुनिक प्रणालियों के व्यापक उपयोग पर बल दिया।
कार्यक्रम में विधि एवं विधायी कार्य मंत्री गजेंद्र यादव, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन.के. चंद्रवंशी, वरिष्ठ न्यायमूर्तिगण, प्रमुख सचिव गृह निहारिका बारिक सिंह, प्रमुख सचिव विधि एवं विधायी कार्य सुषमा सावंत, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, विभिन्न जिलों के न्यायाधीश, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, अभियोजन अधिकारी, एफएसएल विशेषज्ञ, चिकित्सक और विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

