बस्ती, 06 सितंबर। Basti Honey Trap Case: बस्ती में पुलिस ने कथित हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग नेटवर्क का खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह पहले लोगों से दोस्ती करता था, फिर नजदीकियां बढ़ाकर निजी बातचीत, तस्वीरें और वीडियो को कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग का हथियार बनाया जाता था। इसके बाद पैसे की मांग और इनकार करने पर बदनाम करने की धमकी देने का आरोप है।
इस पूरे मामले की कड़ी तब सामने आई, जब वाल्टरगंज थाने के प्रभारी सूर्य प्रकाश सिंह ने 29 अगस्त को अपने सरकारी आवास पर आत्महत्या कर ली। उनकी मौत की जांच के दौरान पुलिस को कुछ ऐसे सुराग मिले, जिनके आधार पर एक महिला, उसके पिता और एक अधिवक्ता को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 32 वर्षीय प्रियंका चौधरी, उसके पिता राम नयन चौधरी और अधिवक्ता विजय प्रकाश यादव के रूप में हुई है।
वाल्टरगंज के थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह मूल रूप से आजमगढ़ के भीलमपुर छपरा गांव के रहने वाले थे। वह 4 साल बाद रिटायर होने वाले थे। परिवार में पत्नी के अलावा एक बेटा और दो बेटियां हैं। बड़ा बेटा संदीप सिंह (30) है। सूर्य प्रकाश सिंह सिद्धार्थनगर से ट्रांसफर होकर बस्ती आए थे। पहले यहां पुलिस लाइन में उन्हें तैनाती मिली थी। 18 अप्रैल, 2026 को उन्हें वाल्टरगंज थाने का इंचार्ज बनाया गया था। 29 अगस्त को वह कलेक्ट्रेट के पास स्थित अपने सरकारी घर में फंदे से लटके मिले थे। उन्होंने सुसाइड से पहले वाट्सएप पर एक स्टेटस लगाया था। इसमें लिखा था- धन-संपदा भी आवश्यक है, परंतु शांति और प्रेम से बढ़कर कुछ भी नहीं है।

पुलिस अफसर की मौत से खुली जांच की कड़ी
बस्ती के DIG संजीव त्यागी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मामले की जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक, सूर्य प्रकाश सिंह की मौत के बाद उनके बेटे संदीप सिंह ने 5 सितंबर को बस्ती कोतवाली थाने में FIR दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने सिंह के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल और संपर्कों की जांच शुरू की। इसी दौरान जांच की कड़ियां प्रियंका चौधरी और उसके संपर्क में रहे लोगों तक पहुंचीं।
पहले मुलाकात, फिर दोस्ती और फिर ब्लैकमेलिंग का आरोप
पुलिस का दावा है कि प्रियंका चौधरी कथित तौर पर लोगों से संपर्क बनाती थी। बातचीत आगे बढ़ने के बाद दोस्ती और नजदीकियां बढ़ाई जाती थीं। इसी दौरान निजी बातचीत, तस्वीरें या वीडियो रिकॉर्ड किए जाने का आरोप है।
पुलिस के मुताबिक, बाद में इन्हीं निजी सामग्री को सार्वजनिक करने या परिवार और समाज में बदनाम करने का डर दिखाकर कथित तौर पर पैसे की मांग की जाती थी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क ने कितने लोगों को निशाना बनाया और क्या इसमें गिरफ्तार तीन आरोपियों के अलावा कोई और व्यक्ति भी शामिल था।
प्रियंका के साथ पिता और वकील की भूमिका का दावा
पुलिस के अनुसार, प्रियंका के साथ उसके पिता राम नयन चौधरी और अधिवक्ता विजय प्रकाश यादव की भूमिका भी जांच में सामने आई है।पुलिस का दावा है कि प्रियंका लोगों से संपर्क बनाती थी, जबकि उसके पिता और वकील कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग और पैसे की वसूली में भूमिका निभाते थे। पुलिस अब आरोपियों के पुराने संपर्कों और संभावित पीड़ितों की जानकारी जुटा रही है।
गंधार गांव में पिता के साथ रहती थी प्रियंका
पुलिस के मुताबिक, प्रियंका चौधरी वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के गंधार गांव में अपने पिता के साथ रहती थी। पुलिस ने बताया कि वह करीब 10 साल से अपने पति से अलग रह रही थी और मुंबई में ब्यूटी पार्लर व स्पा सेंटरों में काम कर चुकी है। जांच में अब उसके पुराने संपर्कों और गतिविधियों को भी खंगाला जा रहा है।
29 अगस्त की आखिरी कॉल बनी अहम कड़ी
DIG संजीव त्यागी के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के विश्लेषण में सूर्य प्रकाश सिंह का प्रियंका चौधरी और विजय प्रकाश यादव से संपर्क सामने आया। पुलिस के अनुसार, 29 अगस्त को दोपहर 1:41 बजे विजय प्रकाश यादव ने सूर्य प्रकाश सिंह को आखिरी कॉल की थी। पुलिस अब इस बातचीत और घटना से पहले की परिस्थितियों की जांच कर रही है।
क्या ब्लैकमेलिंग के दबाव में दी जान?
पुलिस को आशंका है कि सूर्य प्रकाश सिंह को आरोपियों की ओर से कथित तौर पर परेशान या प्रताड़ित किया जा रहा था। जांच का अहम पहलू यह है कि क्या कथित ब्लैकमेलिंग और दबाव का उनकी आत्महत्या से कोई संबंध था। पुलिस कॉल डिटेल, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, आरोपियों से पूछताछ और संभावित पीड़ितों की जानकारी को जोड़कर पूरे मामले की कड़ियां तलाश रही है।
हॉस्पिटल चौराहे से तीनों गिरफ्तार
DIG के मुताबिक, तीनों आरोपियों को हॉस्पिटल चौराहे से गिरफ्तार किया गया। अब पुलिस पूछताछ के जरिए कथित नेटवर्क की दूसरी कड़ियों का पता लगाने में जुटी है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपियों ने बस्ती के अलावा दूसरे शहरों में भी इसी तरीके से लोगों को निशाना बनाया था। फिलहाल जांच जारी है और पुलिस संभावित पीड़ितों तथा नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है। मामले में सामने आए आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।


