Bhagwat Vijayadashami Speech: मोहन भागवत का बड़ा संदेश: हिंदू-मुस्लिम एकता, AI, नशे और आंदोलनों पर क्या बोले RSS प्रमुख?

Bhagwat Vijayadashami Speech: मोहन भागवत का बड़ा संदेश: हिंदू-मुस्लिम एकता, AI, नशे और आंदोलनों पर क्या बोले RSS प्रमुख?

नागपुर, 20 अक्टूबर। Bhagwat Vijayadashami Speech: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर विजयादशमी कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने देश की सामाजिक एकता, राजनीतिक आंदोलनों, हिंदू-मुस्लिम संबंधों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई पीढ़ी की चुनौतियों पर अपनी बात रखी। नागपुर में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति के लिए समाज में सद्भाव बनाए रखना जरूरी है। आंदोलनों का उद्देश्य समस्याओं का समाधान होना चाहिए, न कि सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देना।

आंदोलन समाधान के लिए हों, समाज में विभाजन के लिए नहीं

मोहन भागवत ने कहा कि भारत विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है, लेकिन विकास की प्रक्रिया में समस्याएं भी सामने आती हैं। लोकतंत्र में समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलन होना स्वाभाविक है। हालांकि, आंदोलनों का उद्देश्य समाधान खोजना होना चाहिए। किसी भी गतिविधि से समाज में आपसी द्वेष, टकराव या विभाजन पैदा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आंदोलन यदि किसी दूसरे उद्देश्य से चलाए जाते हैं, तो उनका इस्तेमाल राजनीतिक साधन के रूप में हो सकता है। भागवत ने नेताओं और आंदोलनकारी समूहों से अपनी जिम्मेदारी समझने की अपील करते हुए कहा कि वोट, सस्ती लोकप्रियता और राजनीतिक लाभ की इच्छा सामाजिक सद्भाव पर हावी नहीं होनी चाहिए।

फ्रांस, नेपाल और बांग्लादेश का जिक्र

संघ प्रमुख ने वैश्विक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया में ऐसी शक्तियां सक्रिय हैं, जो अपने हितों के लिए दूसरे देशों की व्यवस्थाओं को प्रभावित करना चाहती हैं। उन्होंने फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल की घटनाओं का जिक्र करते हुए ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन के प्रयासों पर सवाल उठाए। भागवत ने कहा कि भारत को विकसित और शक्तिशाली बनाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने लोगों से किसी भी परिस्थिति में उत्तेजित होने के बजाय आपसी सद्भाव बनाए रखने और विवेकपूर्ण व्यवहार करने की अपील की।

AI और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर चिंता

मोहन भागवत ने विज्ञान और तकनीक की प्रगति को उपयोगी बताते हुए कहा कि इनके इस्तेमाल में विवेक और नैतिकता जरूरी है। तकनीक का उद्देश्य मानव जीवन को बेहतर बनाना होना चाहिए, न कि केवल भौतिक सुविधाओं और उपभोग को बढ़ावा देना।

उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उल्लेख करते हुए कहा कि उपयोगी तकनीक का इस्तेमाल लोगों को भ्रमित करने, ठगने और झूठ फैलाने के लिए भी किया जा सकता है। उन्होंने परमाणु तकनीक के उदाहरण के जरिए बताया कि किसी भी तकनीक का परिणाम इस बात पर निर्भर करता है कि उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है। भागवत ने पर्यावरण संरक्षण, नैतिकता, संयम और समन्वय पर आधारित संतुलित विकास की आवश्यकता पर भी जोर दिया। नेपाल में आई आपदा का जिक्र करते हुए उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में अपनाए गए विकास मॉडल पर भी चिंता जताई।

Gen-Z को सही और गलत का अंतर सिखाने की जरूरत

RSS प्रमुख ने नई पीढ़ी की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि युवाओं को केवल समस्याओं का हिस्सा बनने के बजाय उनका समाधान खोजने वाला बनना चाहिए। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को उचित और अनुचित के बीच अंतर समझाने की अपील की। भागवत ने कहा कि नई पीढ़ी नई चीजें सीखने और अपनाने के लिए उत्सुक रहती है, लेकिन उसे सही आचरण और जिम्मेदारी का महत्व समझना होगा। उन्होंने नशीले पदार्थों की बढ़ती समस्या पर चिंता जताते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नशे के खिलाफ अभियान चलाएगा। उन्होंने डिजिटल सामग्री और OTT प्लेटफॉर्म के संदर्भ में भी विवेकपूर्ण उपयोग की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार, नई पीढ़ी तक पहुंचने वाली सामग्री के अच्छे-बुरे प्रभावों को समझना और उसे सही दिशा देना समाज तथा अभिभावकों की जिम्मेदारी है।

हिंदू-मुस्लिम एकता पर क्या बोले मोहन भागवत?

मोहन भागवत ने कहा कि भारत के सभी लोगों के पूर्वज एक हैं और देश की सांस्कृतिक जड़ों में समानता है। उन्होंने कहा कि किसी की अलग पहचान मिटाए बिना सभी को साथ लेकर चलना जरूरी है। उन्होंने बंगाल विभाजन और 1947 में देश के विभाजन का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में अलगाव की भावना गहरी होने पर उसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। भागवत ने लोगों से आपसी विश्वास, धैर्य और सद्भाव बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा और विचारों में दुनिया की समस्याओं के समाधान देने की क्षमता है। समाज और राष्ट्र की सुरक्षा, कर्तव्यनिष्ठा तथा एकजुटता को उन्होंने महत्वपूर्ण बताया।

युवाओं से राष्ट्रबोध और कर्तव्यनिष्ठा अपनाने की अपील

संघ प्रमुख ने युवाओं से राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी समझने और सकारात्मक भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज में अच्छा वातावरण बनाए रखने के लिए प्रत्येक नागरिक को अपने व्यवहार में सावधानी बरतनी चाहिए। मोहन भागवत के विजयादशमी संबोधन का प्रमुख संदेश सामाजिक सद्भाव, जिम्मेदार आंदोलनों, तकनीक के विवेकपूर्ण उपयोग और नई पीढ़ी को सही दिशा देने पर केंद्रित रहा। उन्होंने भारत की प्रगति के लिए एकजुटता, नैतिकता और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध को आवश्यक बताया।

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