रायपुर, 30 अक्टूबर 2026। State Festival Special : छत्तीसगढ़ के जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान को अब आधुनिक तकनीक के जरिए नई पहचान मिल रही है। नवा रायपुर अटल नगर में निर्मित ‘शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय’ जनजातीय शौर्य, इतिहास और डिजिटल तकनीक के अनूठे संगम के रूप में उभरा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और जनजातीय कल्याण मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में तैयार यह स्मारक उन वीर नायकों की गाथाओं को सामने ला रहा है, जिन्हें इतिहास में अपेक्षित स्थान नहीं मिल पाया था।
प्रधानमंत्री मोदी ने 2025 में किया था लोकार्पण
छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर 1 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस संग्रहालय को राष्ट्र को समर्पित किया था। करीब 50 से 55 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह संग्रहालय जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को आधुनिक डिजिटल माध्यमों से प्रस्तुत करने वाली देश की विशिष्ट परियोजनाओं में शामिल है। इसका उद्देश्य प्रदेश के जनजातीय समाज की ऐतिहासिक विरासत, संस्कृति और स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।
650 से अधिक मूर्तिशिल्पों में दिखता है संघर्ष का इतिहास
संग्रहालय की दीर्घाओं में 650 से अधिक जीवंत मूर्तिशिल्पों के माध्यम से जनजातीय वीरों के संघर्ष को दर्शाया गया है। यहां हल्बा, सरगुजा, भोपालपट्टनम, परलकोट, तारापुर, लिंगागिरी, कोई, मेरिया, मुरिया, रानी चौरिस, भूमकाल और सोनाखान जैसे ऐतिहासिक विद्रोहों की गाथाएं प्रस्तुत की गई हैं।
सोनाखान के अमर शहीद वीर नारायण सिंह के संघर्ष को भी प्रमुखता से दर्शाया गया है। अंग्रेजी शासन के शोषण और अन्याय के खिलाफ उनका विद्रोह छत्तीसगढ़ के इतिहास में साहस, सामाजिक न्याय और स्वाभिमान का महत्वपूर्ण अध्याय है। इसके अलावा झंडा सत्याग्रह और जंगल सत्याग्रह से जुड़ी विशेष दीर्घाएं भी स्वतंत्रता आंदोलन में प्रदेश के योगदान को सामने लाती हैं।
वीएफएक्स और डिजिटल प्रोजेक्शन से मिलता है इतिहास का अनुभव
इस संग्रहालय की खासियत केवल इसकी ऐतिहासिक सामग्री नहीं, बल्कि उसे प्रस्तुत करने का आधुनिक तरीका भी है। वीएफएक्स, डिजिटल प्रोजेक्शन, दृश्य-श्रव्य प्रस्तुतियों और जीवंत मूर्तिशिल्पों के जरिए ऐतिहासिक घटनाओं को इस तरह दिखाया गया है कि दर्शक उस दौर के संघर्ष को करीब से महसूस कर सकें।
हर दीर्घा में डिजिटल सूचना बोर्ड और क्यूआर कोड की सुविधा उपलब्ध है। आगंतुक मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन कर संबंधित विद्रोहों और स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। प्रशिक्षित गाइड भी संग्रहालय का भ्रमण करने वालों को ऐतिहासिक घटनाओं और जनजातीय नायकों के योगदान से परिचित कराते हैं।
तीन लाख से अधिक लोग देख चुके हैं संग्रहालय
संग्रहालय शुरू होने के बाद से ही यहां आने वाले लोगों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सामान्य दिनों में एक से दो हजार और अवकाश के दिनों में चार से पांच हजार तक दर्शक पहुंच रहे हैं। अब तक तीन लाख से अधिक लोग इस ऐतिहासिक परिसर का भ्रमण कर चुके हैं।
यहां सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज मैरीकॉम सहित विभिन्न राज्यों के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी, सैन्य जवान तथा विदेशी पर्यटक भी पहुंच चुके हैं। संग्रहालय में पेयजल, पार्किंग, सीसीटीवी सुरक्षा, प्राथमिक उपचार, दिव्यांगजनों के लिए व्हीलचेयर और शिशु देखभाल कक्ष जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।
जनजातीय गौरव के साथ पर्यटन और रोजगार को भी बढ़ावा
यह स्मारक विद्यार्थियों और युवाओं को यह समझने का अवसर दे रहा है कि देश की आजादी में दूरस्थ वनांचलों के जनजातीय समाज का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके संघर्ष और बलिदान भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के व्यापक इतिहास का अभिन्न हिस्सा हैं।
इसके साथ ही संग्रहालय नवा रायपुर को सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पर्यटन के नए केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद कर रहा है। पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही से स्थानीय रोजगार, पर्यटन सेवाओं और आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में तैयार यह संग्रहालय छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक तकनीक के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास है। यह स्मारक केवल अतीत की यादों को संजोने वाला परिसर नहीं, बल्कि जनजातीय स्वाभिमान, स्वतंत्रता के संघर्ष और अमर बलिदानियों के सम्मान का प्रतीक बनकर उभरा है।

