रायपुर, 31 अक्टूबर 2026। CG Farmers News : छत्तीसगढ़ की पहचान देश के धान के कटोरे के रूप में है और यहां की अर्थव्यवस्था की सबसे मजबूत नींव किसान हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने पिछले तीन वर्षों में कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। धान खरीदी से लेकर आर्थिक सहायता, आधुनिक कृषि यंत्र, सिंचाई सुविधाओं और फसल विविधीकरण तक कई योजनाओं का विस्तार किया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन खरीफ सीजन में प्रदेश में लगभग 437 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई और किसानों को 1.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया। वहीं, आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की तैयारी की गई है।
तीन साल में 437 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी, किसानों को मिला रिकॉर्ड भुगतान
राज्य सरकार के अनुसार, खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में लगभग 144.92 लाख मीट्रिक टन और 2024-25 में 149.25 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई। वहीं, वर्ष 2025-26 में लगभग 142 लाख मीट्रिक टन धान का उपार्जन हुआ। इस तरह तीन खरीफ सीजन में कुल लगभग 437 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया और किसानों को करीब 1.40 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। धान खरीदी की मजबूत व्यवस्था से किसानों को उनकी उपज का मूल्य मिलने के साथ ग्रामीण बाजार और अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।
3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से होगी धान खरीदी, 360 नए केंद्र खुलेंगे
किसानों के हित में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इस बार 27.50 लाख से अधिक किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से धान खरीदा जाएगा। किसानों को पंजीयन में राहत देते हुए एग्रीस्टैक आईडी वाले पिछले वर्ष के पंजीकृत किसानों को दोबारा पंजीयन से छूट दी गई है। धान बेचने के लिए समिति में ऋण पुस्तिका लाने की अनिवार्यता भी समाप्त की गई है। डिजिटल क्रॉप सर्वे से रकबे का ऑनलाइन निर्धारण और बायोमेट्रिक आधारित खरीदी से पारदर्शिता बढ़ाई जाएगी। इस वर्ष 360 नए उपार्जन केंद्र शुरू होने के बाद प्रदेश में कुल 3100 केंद्रों के माध्यम से धान खरीदी की जाएगी।
कृषक उन्नति योजना से 35,904 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता
किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए संचालित कृषक उन्नति योजना के तहत खरीफ 2023 से खरीफ 2025 तक लगभग 25.52 लाख किसानों को 35,904.90 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। इसके अलावा धान के स्थान पर अन्य लाभकारी फसलों की खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए सहायता राशि 11 हजार रुपये से बढ़ाकर 15 हजार रुपये प्रति एकड़ कर दी गई है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत भी प्रदेश के किसानों को अब तक 12,267.39 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी जा चुकी है। इन योजनाओं के माध्यम से किसानों को खेती के खर्च और घरेलू जरूरतों के लिए आर्थिक संबल उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
आधुनिक खेती और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार पर जोर
कृषि को आधुनिक और लाभकारी बनाने के लिए वर्ष 2024-25 से अब तक किसानों को 8,567 कृषि यंत्र उपलब्ध कराए गए हैं। इसके साथ ही 678 फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किए गए हैं। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत 46,615 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई का विस्तार किया गया है तथा किसानों को 201.07 करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान दिया गया है। एग्रीस्टैक के माध्यम से 19,751 गांवों की जियो-रेफरेंसिंग पूरी हो चुकी है और 43 लाख से अधिक किसानों का पंजीयन किया गया है। दलहन एवं तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के तहत 29 जिलों के 273 केंद्रों पर अरहर, सोयाबीन, चना, मसूर और सरसों की खरीदी की गई। इसके एवज में किसानों को 219.08 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के तहत 94,615 हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तार और 10 तेल निष्कर्षण इकाइयों की स्थापना प्रस्तावित है।
फसल बीमा, खाद उपलब्धता और किसान सुरक्षा पर भी ध्यान
किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और फसल नुकसान से सुरक्षा देने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ एवं रबी 2025-26 में 16.70 लाख से अधिक किसानों ने बीमा कराया। इनमें से 1 लाख 40 हजार 730 किसानों को 292.43 करोड़ रुपये का दावा भुगतान किया गया। वहीं, खरीफ 2026 में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 15.55 लाख मीट्रिक टन के निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले 18.02 लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरक का भंडारण किया गया। खाद की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए निरीक्षण और कार्रवाई भी की गई। प्रदेश में लगभग 40 लाख कृषक परिवार हैं, जिनमें 82 प्रतिशत किसान लघु एवं सीमांत श्रेणी के हैं। ऐसे में कृषि क्षेत्र का विकास सीधे ग्रामीण समृद्धि से जुड़ा हुआ है। राज्योत्सव के अवसर पर सरकार ने किसानों की खुशहाली, आधुनिक खेती और मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था को विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का प्रमुख आधार बताया है।

