9 साल में 3600 हमले, बांग्लादेश में तेजी से क्यों घट रही हिंदू आबादी; यह है असल वजह

नई दिल्ली, 22 अक्टूबर। बांग्लादेश में पिछले कई दिनों से अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ लगातार हमले हो रहे हैं। हालांकि साल 1971 में बांग्लादेश के जन्म होने के साथ ही हिंदू समुदाय के साथ मार-पीट शुरू हो गई थी। बांग्लादेश के जन्म होने के बाद 1974 में जनगणना हुई थी। इसके मुताबिक देश में 1974 में 13.5 फीसदी हिंदू थे, लेकिन वर्ष 2011 में देश में महज 8.5 प्रतिशत हिंदू ही रह गए थे। 2011 से 2021 तक इसमें करीब तीन फीसदी की और गिरावट आ चुकी है। आलम यह है कि हिंदुओं की संख्या साल-दर-साल घटती जा रही है।
हिंदुओं पर बढ़े अत्याचार
पाकिस्तान से अलग देश बनने के बाद से हिंदुओं पर अत्याचार बढ़ने लगे थे। इसके बाद से ऐसा कोई साल नहीं जब अल्पसंख्यक समुदाय को हमले का सामना न करना पड़ा हो। पिछले नौ साल में हिंदुओं पर 3600 से ज्यादा हमले हुए हैं। ये मानवाधिकार संगठनों का आंकड़ा है। बांग्लादेश में 1990, 1995, 1999, 2002 में बड़े दंगे हुए थे। इनमें हिंदुओं को ही निशाना बनाया गया था। अब तो बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ करना, हिंदुओं के घर जलाना, बच्चों और लड़कियों का अपहरण, दुष्कर्म जैसी वारदात यहां आम हो गई हैं।
कट्टरपंथ बढ़ने की वजह
रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की मुख्य वजह उनकी जमीन हड़पने की कोशिश है। ढाका टाइम्स की कई रिपोर्ट में इस तथ्य की ओर इशारा किया गया है। दरअसल, यहां के हिंसा के पैटर्न में देखा गया है कि बहुसंख्यक आबादी गरीब हिंदुओं के घर जला देती है। घर जलने से ये हिंदू परिवार पलायन करने को मजबूर होते हैं और जब वे पलायन कर जाते हैं तो उनकी जमीन पर ये लोग कब्जा कर लेते हैं।
2050 तक खत्म हो जाएंगे हिंदू
वर्ष 2016 में बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर एक किताब आई थी। उस किताब में दावा किया गया था कि अगले करीब तीन दशक में बांग्लादेश से हिंदुओं का नामोनिशान मिट जाएगा। दरअसल, यह किताब ढाका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. अबुल बरकत की शोध पर आधारित है। बरकत के मुताबिक हर दिन अल्पसंख्यक समुदाय के औसतन 632 लोग बांग्लादेश छोड़कर जा रहे हैं।
कट्टरपंथी संगठनों का प्रभाव बढ़ा
बांग्लादेश में कट्टरपंथी संगठनों का प्रभाव काफी ज्यादा बढ़ गया है। कट्टरपंथी संगठन अक्सर अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को निशाना बनाते हैं। देश भर में कट्टरपंथी सोच वाले लोगों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। हिंदू समुदाय के खिलाफ वे जल्द ही लामबंद हो जाते हैं।
1971 में सबसे ज्यादा जुर्म हुआ
बांग्लादेश के इतिहास में हिंदुओं पर सबसे ज्यादा जुर्म 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान हुआ। इस दौरान पाकिस्तानी सेना ने हिंदुओं के गांव के गांव का सफाया कर दिया। एक रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान 30 लाख से अधिक हिंदुओं का नरसंहार किया गया।
वर्ष हिंदू आबादी (फीसदी)
– 1974 13.5
– 1981 12.1
– 1991 10.5
– 2001 9.3
– 2011 8.5
– 2021 में अनुमानित 6.5
(स्रोत-बांग्लादेश ब्यूरो ऑफ स्टेटिक्स)