रायपुर, 31 जनवरी। Chhattisgarh Chamber : छत्तीसगढ़ के व्यापारिक हितों की रक्षा और आम जनता को राहत दिलाने की दिशा में छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज को एक बड़ी सफलता मिली है। अचल संपत्तियों की पंजीयन दरों एवं नई गाइडलाइन में मौजूद विसंगतियों को लेकर चेम्बर द्वारा उठाए गए मुद्दों पर राज्य सरकार ने सकारात्मक निर्णय लेते हुए महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है।
इस उपलब्धि के बाद आज 31 जनवरी 2026 को चेम्बर प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने माननीय वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी से सौजन्य भेंट की। प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश के व्यापारियों, किसानों एवं आम नागरिकों की ओर से पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका आभार व्यक्त किया।

चेम्बर की प्रमुख मांगों पर मिला सकारात्मक निर्णय
प्रेस को संबोधित करते हुए चेम्बर प्रदेश अध्यक्ष श्री सतीश थौरानी ने बताया कि चेम्बर ने अपने पत्र के माध्यम से अचल संपत्ति पंजीयन से जुड़ी कई व्यावहारिक समस्याओं की ओर शासन का ध्यान आकर्षित किया था। इनमें प्रमुख रूप से, पंजीयन शुल्क में कमी, नवा रायपुर के गांवों को नगरीय क्षेत्र की बाध्यता से मुक्त करना, बहुमंजिला इमारतों का आनुपातिक मूल्यांकन जैसे सुझाव शामिल थे, जिन पर सरकार ने सहमति जताई।
रियल एस्टेट सेक्टर को मिलेगी नई गति
इस अवसर पर वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल राजस्व संकलन नहीं, बल्कि आम जनता और व्यापारियों के लिए सरल, पारदर्शी और अनुकूल वातावरण तैयार करना है। चेम्बर के सुझावों को स्वीकार कर पंजीयन दरों को युक्तिसंगत बनाया गया है, जिससे रियल एस्टेट सेक्टर को नई गति मिलेगी।
बड़ी संख्या में पदाधिकारी रहे उपस्थित
इस अवसर पर चेम्बर प्रदेश अध्यक्ष श्री सतीश थौरानी के साथ अल्पसंख्यक आयोग अध्यक्ष छत्तीसगढ़ शासन एवं चेम्बर सलाहकार अमरजीत सिंह छाबड़ा, चेम्बर सलाहकार अमर गिदवानी, वाइस चेयरमेन चेतन तारवानी, कार्यकारी अध्यक्ष राधाकिशन सुंदरानी, राजेश वासवानी, जसप्रीत सिंह सलूजा, उपाध्यक्ष दिलीप इसरानी, प्रकाश लालवानी, अमरदास खट्टर, राजकुमार तारवानी, राजेश गिदवानी, संतोष जैन, सोनिया साहू, मंत्री भरत प्रधानानी, जतिन नचरानी, महिला चेम्बर अध्यक्षा डॉ. ईला गुप्ता, कोषाध्यक्ष नम्रता अग्रवाल सहित नितिन बरडिया एवं अन्य चेम्बर सदस्य प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
सभी ने एक स्वर में वित्त मंत्री द्वारा लिए गए त्वरित एवं जनहितकारी निर्णय की सराहना करते हुए इसे छत्तीसगढ़ के आर्थिक विकास में एक ‘मील का पत्थर’ बताया।

