Special Article : अबूझमाड़ की मेधा ने गढ़ दिया ‘नारायणपुर’ में शिक्षा के शिखर पर वनांचल की गौरवगाथा

Special Article : अबूझमाड़ की मेधा ने गढ़ दिया ‘नारायणपुर’ में शिक्षा के शिखर पर वनांचल की गौरवगाथा

रायपुर, 02 मई। Special Article : छत्तीसगढ़ के मानचित्र पर जिसे कभी दुर्गम और ‘अबूझ’ माना जाता था, आज उसी नारायणपुर ने अपनी बौद्धिक क्षमता का लोहा पूरे प्रदेश में मनवा लिया है। साल 2026 की बोर्ड परीक्षा के परिणामों ने यह सिद्ध कर दिया है कि बस्तर के घने जंगलों और अबूझमाड़ की वादियों में अब केवल संघर्ष की गूँज नहीं, बल्कि सफलता का शंखनाद सुनाई दे रहा है। कक्षा 10वीं में समूचे छत्तीसगढ़ में दूसरा स्थान प्राप्त करना नारायणपुर के लिए महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक शैक्षणिक क्रांति है।

नारायणपुर का उदय,छत्तीसगढ़ का गौरव

जिले की इस अभूतपूर्व सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विद्यार्थियों और जिला प्रशासन की सराहना की है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि नारायणपुर के बच्चों ने आज जो कर दिखाया है, वह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। अबूझमाड़ की माटी से निकलकर प्रदेश की मेरिट सूची में जगह बनाना यह साबित करता है कि हमारी सरकार की ‘शिक्षा-पहुँच’ नीति सफल हो रही है। नारायणपुर अब केवल अपनी संस्कृति के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी मेधा के लिए भी जाना जाएगा। इन नौनिहालों ने नक्सलवाद और पिछड़ेपन के अंधेरे को शिक्षा की रोशनी से परास्त कर दिया है। 

दसवें से दूसरे पायदान तक एक अद्भुत छलांग

इतिहास गवाह है कि विकास की पहली सीढ़ी शिक्षा होती है। पिछले एक साल में नारायणपुर ने जो परिवर्तन देखा है, वह किसी चमत्कार से कम नहीं है। वर्ष 2025 में 84.96% के साथ 10वें स्थान पर रहने वाला यह जिला, महज़ एक साल में 94.80% की सफलता दर के साथ सीधे प्रदेश में दूसरे स्थान पर जा पहुँचा। वहीं, 12वीं के परिणामों में भी जिले ने अपनी रैंकिंग में 7 अंकों का शानदार सुधार करते हुए 12वां स्थान हासिल किया है।

रणनीति ऐसी कि बदल गई तस्वीर

इस सफलता की पटकथा उन सरकारी स्कूलों की कक्षाओं में लिखी गई, जहाँ जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने मिलकर ‘मिशन मोड’ में काम किया। कलेक्टर के मार्गदर्शन में बोर्ड परीक्षार्थियों के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की गई। मॉडल टेस्ट, प्री-बोर्ड परीक्षाओं और ‘रिमेडियल कक्षाओं’ के जरिए कमजोर विद्यार्थियों को मुख्यधारा में लाया गया। शिक्षकों के समर्पण और प्रशासन की सतत निगरानी ने वनांचल के बच्चों के भीतर ‘परीक्षा के डर’ को ‘जीत के उत्साह’ में बदल दिया।

विकास का नया प्रतिमान,अबूझमाड़ से मुख्यधारा तक

जब हम आधारभूत संरचना की बात करते हैं, तो अक्सर सड़कों की गिनती होती है। परंतु नारायणपुर ने साबित किया है कि वास्तविक विकास ‘मानव पूंजी’ का विकास है। सुदूर वनांचल क्षेत्रों में विशेष उपस्थिति अभियान चलाकर और समयबद्ध पाठ्यक्रम पूर्ण कर प्रशासन ने एक ऐसा वातावरण तैयार किया, जहाँ शिक्षा एक उत्सव बन गई।

अबूझमाड़ के बच्चे अब केवल वनों के संरक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी बनने की दौड़ में प्रदेश के अन्य विकसित जिलों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।

एक उज्ज्वल भविष्य का आगाज़

अभिभावकों के साथ सतत संवाद और शिक्षकों का अटूट परिश्रम ही इस ऐतिहासिक सफलता का मूल मंत्र है। नारायणपुर की यह उपलब्धि पूरे प्रदेश के लिए एक संदेश है—कि संसाधनों की कमी कभी प्रतिभा का मार्ग नहीं रोक सकती, बशर्ते संकल्प श्री विष्णु देव साय के ‘सुशासन’ जैसा सुदृढ़ हो। आज ‘अबूझ’ अब ‘बूझ’ में बदल चुका है और शिक्षा की यह मशाल अब रुकने वाली नहीं है।

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