National Song : पश्चिम बंगाल में बड़ा बदलाव…! मदरसों में लागू हुआ ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य…रोकने वालों पर जेल और जुर्माने दोनों का प्रावधान…आदेश जारी होते ही बढ़ी सियासी हलचल

National Song : पश्चिम बंगाल में बड़ा बदलाव…! मदरसों में लागू हुआ ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य…रोकने वालों पर जेल और जुर्माने दोनों का प्रावधान…आदेश जारी होते ही बढ़ी सियासी हलचल

कोलकाता, 21 मई। National Song : पश्चिम बंगाल की शुभेंदु सरकार ने राज्य के सभी मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य कर दिया है। इस संबंध में मदरसा शिक्षा निदेशालय की ओर से 19 मई 2026 को आधिकारिक आदेश जारी किया गया।

जारी निर्देश में कहा गया है कि पहले लागू सभी नियमों और प्रथाओं को निरस्त करते हुए अब कक्षाएं शुरू होने से पहले होने वाली प्रार्थना सभा में ‘वंदे मातरम्’ गाना जरूरी होगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

किन संस्थानों पर लागू होगा आदेश?

सरकार का यह फैसला राज्य के सभी सरकारी मॉडल मदरसों (इंग्लिश मीडियम), मान्यता प्राप्त सहायता प्राप्त मदरसों, अप्रूव्ड MSK, अप्रूव्ड SSK और गैर सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त मदरसों पर लागू होगा।

मदरसा शिक्षा निदेशक की ओर से जारी आदेश की प्रतियां सभी जिलाधिकारियों, जिला शिक्षा अधिकारियों, पश्चिम बंगाल मदरसा शिक्षा बोर्ड और संबंधित विभागों को भेज दी गई हैं। आदेश में साफ कहा गया है कि इसे सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद जारी किया गया है।

‘वंदे मातरम्’ को लेकर बढ़ी राजनीतिक चर्चा

इस फैसले के बाद राज्य में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के बराबर कानूनी संरक्षण देने की दिशा में कदम बढ़ाए जाने की चर्चा के बीच बंगाल सरकार का यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित प्रावधान लागू होने के बाद ‘वंदे मातरम्’ गाने के दौरान बाधा डालना या अपमान करना संज्ञेय अपराध माना जा सकता है। वर्तमान कानून के तहत राष्ट्रगान में बाधा डालने पर 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। लगातार उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी हो सकती है।

देशभर में छिड़ सकती है नई बहस

बंगाल सरकार के (National Song) इस फैसले के बाद शिक्षा संस्थानों में राष्ट्रगीत को लेकर नई बहस शुरू होने के आसार हैं। राजनीतिक दलों के साथ-साथ सामाजिक और धार्मिक संगठनों की नजर भी अब इस फैसले पर टिकी हुई है।

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राष्ट्रीय शिक्षा