नई दिल्ली, 22 जून। Monsoon Alert 2026 : देश में मॉनसून 2026 की शुरुआत उम्मीदों के विपरीत चिंताजनक रही है। 21 जून तक देश में औसतन केवल 46 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 84.4 मिमी मानी जाती है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार यह करीब 46 प्रतिशत की कमी है। मानसून की कमजोर शुरुआत ने किसानों, जल संसाधन विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है।
बारिश में आई इस बड़ी कमी के पीछे सबसे प्रमुख कारण प्रशांत महासागर में विकसित हो रहा अल-नीनो प्रभाव माना जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक अल-नीनो के और मजबूत होने की संभावना है, जिससे भारत में मानसूनी गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। इसके साथ ही इंडियन ओशन डाईपोल (IOD) फिलहाल न्यूट्रल स्थिति में है, जो मानसून को अतिरिक्त समर्थन नहीं दे रहा। वहीं मेडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) की कमजोर सक्रियता और मध्य भारत में क्रॉस-इक्वेटोरियल हवाओं की सुस्ती ने नमी की आपूर्ति कम कर दी है।
सूखे का इतिहास बढ़ाता है चिंता
भारत में मानसून का इतिहास कई उतार-चढ़ावों से भरा रहा है। 1871 से 2015 के बीच देश में 26 बार सूखे की स्थिति बनी। वर्ष 1972 में सबसे गंभीर सूखा दर्ज किया गया था, जब बारिश सामान्य से 23.9 प्रतिशत कम रही। वहीं 2009 में भी वर्षा में 22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई थी। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अल-नीनो वाले वर्षों में अक्सर वर्षा कम होती है, हालांकि 1997 में पॉजिटिव IOD के कारण सामान्य बारिश दर्ज की गई थी।
खरीफ फसलों और जल संकट पर असर
मानसून की सुस्ती का सीधा असर खरीफ सीजन की बुआई पर पड़ सकता है। धान, मक्का और दलहन जैसी फसलें पर्याप्त बारिश पर निर्भर करती हैं। जलाशयों में पानी की कमी से सिंचाई और पेयजल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। कई शहरों में जल प्रबंधन को लेकर पहले से ही सतर्कता बढ़ा दी गई है।
जून के आखिरी सप्ताह में राहत की उम्मीद
हालांकि मौसम विभाग ने राहत की संभावना भी जताई है। IMD के अनुसार जून के अंतिम सप्ताह में सोमाली जेट के मजबूत होने से अरब सागर से नमी की आपूर्ति बढ़ सकती है। इसका असर महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड, बिहार समेत कई राज्यों में अच्छी बारिश के रूप में दिखाई दे सकता है।
बदल रहा है मानसून का मिजाज
विशेषज्ञों के मुताबिक जलवायु परिवर्तन भारतीय मानसून के स्वरूप को तेजी से बदल रहा है। इससे एक ओर अत्यधिक बारिश की घटनाएं बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर लंबे सूखे का खतरा भी गहरा रहा है। IMD का अनुमान है कि 2026 में मानसून सामान्य से कम यानी लगभग 90 प्रतिशत LPA रहने की 60 प्रतिशत संभावना है।
फिलहाल देश की नजरें जून के आखिरी सप्ताह (Monsoon Alert 2026) पर टिकी हैं। यदि मानसून ने रफ्तार नहीं पकड़ी तो खेती, जल प्रबंधन और अर्थव्यवस्था के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

