काठमांडू, 29 अगस्त। Nepal Flood School : नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बीच त्रिशूली घाटी से ऐसी कहानी सामने आई है, जो हर किसी को हैरान कर देगी। उत्तरी-मध्य नेपाल की त्रिशूली घाटी में स्थित त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल में बुधवार को करीब 1600 बच्चे पढ़ाई के लिए पहुंचे थे। स्कूल में उस वक्त करीब 1644 लोग मौजूद थे, लेकिन बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ने की खबर मिलते ही प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी ने कुछ ही मिनटों में ऐसे फैसले लिए, जिससे 1643 लोगों की जान बच गई।
अचानक आया फोन और बदल गए हालात
बुधवार को स्कूल सामान्य दिनों की तरह खुला था। करीब 900 बच्चे स्कूल पहुंच चुके थे और बाकी बच्चे भी स्कूल आने वाले थे। तभी प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी के मोबाइल पर उनके एक दोस्त का फोन आया।
दोस्त ने उन्हें बताया कि इलाके में बाढ़ आ चुकी है और ऊपर की तरफ बसे गांव भी पानी की चपेट में आ गए हैं। खतरे की गंभीरता समझते हुए राजेंद्र ने घबराने के बजाय तुरंत स्कूल बसों और आने वाले बच्चों की जानकारी जुटाई। उन्हें पता चला कि करीब 700 बच्चे अभी स्कूल पहुंचने बाकी हैं।
प्रिंसिपल ने तुरंत बसों को लौटने का दिया आदेश
स्कूल नदी से करीब 200 फीट की ऊंचाई पर था, लेकिन प्रिंसिपल ने खतरा मोल लेना उचित नहीं समझा। उन्होंने स्कूल आने वाली बसों के ड्राइवरों को फोन करना शुरू किया और बसों को स्कूल लाने के बजाय वापस लौटने का निर्देश दिया। इसी बीच एक अभिभावक ने भी फोन कर बताया कि बाढ़ का पानी तेजी से स्कूल की ओर बढ़ रहा है।
तभी एक स्कूल बस स्कूल की तरफ आती दिखाई दी। राजेंद्र दवाड़ी ने तत्काल ड्राइवर को बस वापस मोड़ने के लिए कहा। ड्राइवर ने बस मोड़ ली और जैसे ही उसने स्कूल के सामने बने पुल को पार किया, वह पुल बाढ़ के पानी में बह गया।
अगर बस कुछ मिनट और रुक जाती, तो बड़ा हादसा हो सकता था।
बच्चों को लेकर पहाड़ी पर जाने का फैसला
स्कूल में बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ने लगा तो बच्चों और शिक्षकों में डर का माहौल बन गया। ऐसे वक्त में प्रिंसिपल ने एक और बड़ा फैसला लिया। उन्होंने सभी शिक्षकों से कहा कि बच्चों को लेकर तुरंत पहाड़ी की ऊंचाई पर चले जाएं।
एक बच्ची को पैनिक अटैक आने पर राजेंद्र ने उसे मोटरसाइकिल पर बैठाकर सुरक्षित स्थान की ओर पहुंचाया। बाकी बच्चों को शिक्षकों के साथ पैदल पहाड़ी पर भेजा गया। सभी बच्चों को सुरक्षित भेजने के बाद प्रिंसिपल ने स्कूल में दोबारा जाकर स्थिति की जांच की और फिर खुद भी पहाड़ी की ओर निकल गए।
बोधि वृक्ष के नीचे मिली सुरक्षित जगह
आखिरकार सभी बच्चे, शिक्षक और कर्मचारी पहाड़ी की ऊंचाई पर पहुंचे और बोधि वृक्ष के नीचे बैठकर बाढ़ के कम होने का इंतजार किया।स्कूल में मौजूद कुल 1644 लोगों में से 1643 लोगों को बचा लिया गया। हालांकि, इस त्रासदी में स्कूल के सोशल हिस्ट्री के शिक्षक सैंटोस परियार की जान नहीं बचाई जा सकी। वह बाढ़ के तेज बहाव में बह गए।
एक शिक्षक की मौत, 1643 जिंदगियां सुरक्षित
नेपाल की इस भयावह बाढ़ के बीच प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी की सतर्कता और समय पर लिए गए फैसले ने सैकड़ों बच्चों समेत कुल 1643 लोगों की जिंदगी बचा दी। एक फोन कॉल को गंभीरता से लेना, बसों को वापस भेजना और बच्चों को तुरंत ऊंचाई पर पहुंचाना, इन फैसलों ने एक बड़े हादसे को टाल दिया।

