Jhiram Ghati Verdict: महेंद्र कर्मा और नंदकुमार पटेल सहित कई नेताओं की हत्या; NIA कोर्ट आज 13 साल बाद 10 आरोपियों पर सुनाएगी अपना फ़ैसला

Jhiram Ghati Verdict: महेंद्र कर्मा और नंदकुमार पटेल सहित कई नेताओं की हत्या; NIA कोर्ट आज 13 साल बाद 10 आरोपियों पर सुनाएगी अपना फ़ैसला

जगदलपुर, 31 अगस्त। Jhiram Ghati Verdict: छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े और चर्चित नक्सली हमलों में शामिल झीरम घाटी हत्याकांड मामले में आज बड़ा फैसला आने वाला है। करीब 13 साल पुराने इस मामले में NIA की विशेष अदालत 10 आरोपियों को लेकर अपना निर्णय सुनाएगी। इस मामले में पहले 11 आरोपी शामिल थे, लेकिन इनमें से एक आरोपी की मौत हो चुकी है। ऐसे में अब अदालत का फैसला शेष 10 आरोपियों को लेकर आना है। लंबे समय से चल रहे इस बहुचर्चित मामले के फैसले पर बस्तर समेत पूरे छत्तीसगढ़ और देश की नजरें टिकी हुई हैं।

20 अगस्त को पूरी हुई थी सुनवाई

झीरम घाटी हत्याकांड मामले में लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अंतिम सुनवाई 20 अगस्त को पूरी हो चुकी थी। इसके बाद से ही अदालत के फैसले का इंतजार किया जा रहा था। करीब 13 साल पुराने इस मामले में आज आने वाला फैसला बेहद अहम माना जा रहा है।

25 मई 2013 को हुआ था खूनी हमला

25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा सुकमा से जगदलपुर की ओर लौट रही थी। इसी दौरान दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी में घात लगाए नक्सलियों ने कांग्रेस नेताओं के काफिले पर हमला कर दिया था। हमलावरों ने पहले काफिले को निशाना बनाया और इसके बाद कांग्रेस नेताओं पर अंधाधुंध गोलीबारी की। इस हमले ने न सिर्फ छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।

महेंद्र कर्मा, नंदकुमार पटेल सहित कई नेताओं की गई जान

झीरम घाटी हमले में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं की मौत हुई थी। मृतकों में बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा, तत्कालीन PCC अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ कांग्रेस नेता विद्याचरण शुक्ल और उदय मुदलियार सहित कई प्रमुख लोग शामिल थे। हमले में सुरक्षा बलों के जवान भी शहीद हुए थे, जबकि एक आम नागरिक की भी जान गई थी।

छत्तीसगढ़ की राजनीति को झकझोर देने वाली घटना

झीरम घाटी हमला सिर्फ एक नक्सली वारदात नहीं था, बल्कि इस घटना ने छत्तीसगढ़ की राजनीति को भी गहराई से प्रभावित किया। कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान पार्टी के कई शीर्ष नेताओं की एक साथ मौत ने प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर बदल दी थी। इसके बाद बस्तर में नक्सल समस्या, राजनीतिक हिंसा और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर देशभर में गंभीर बहस हुई।

13 साल बाद फैसले का इंतजार खत्म होने के करीब

झीरम घाटी हत्याकांड को करीब 13 साल बीत चुके हैं। लंबे समय तक चली जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद NIA की विशेष अदालत में मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है। अब सबकी निगाहें अदालत के फैसले पर टिकी हैं। 25 मई 2013 को हुए उस खूनी हमले से जुड़े मामले में आज 10 आरोपियों के भविष्य पर बड़ा निर्णय आने वाला है। झीरम घाटी हत्याकांड का यह फैसला बस्तर और छत्तीसगढ़ की राजनीति के सबसे चर्चित मामलों में एक अहम पड़ाव साबित हो सकता है।

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