रायपुर, 08 सितंबर। Raipur Jail Ganesh Idol: जिन हाथों ने कभी अपराध का रास्ता चुना था, आज वही हाथ भगवान गणेश की प्रतिमाओं को आकार दे रहे हैं। केंद्रीय जेल रायपुर में बंदियों ने अपनी रचनात्मकता और हुनर को सकारात्मक दिशा देते हुए आगामी गणेशोत्सव के लिए करीब 500 पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं तैयार की हैं।
लगभग 1 से 2 फीट आकार की इन प्रतिमाओं को प्राकृतिक मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से तैयार किया गया है। इन मूर्तियों की सबसे खास बात यह है कि इनमें तुलसी समेत विभिन्न पौधों के बीज भी डाले गए हैं।
मूर्ति का विसर्जन होगा, लेकिन साथ में उगेगी जिंदगी
इन गणेश प्रतिमाओं को इस तरह तैयार किया गया है कि गणेशोत्सव के बाद विसर्जन के दौरान इनमें मौजूद बीज मिट्टी के संपर्क में आने के बाद अंकुरित होकर पौधों का रूप ले सकें।
यानी इन प्रतिमाओं की कहानी विसर्जन के साथ खत्म नहीं होगी। मूर्ति मिट्टी में मिलेगी और उसी मिट्टी से नई जिंदगी जन्म लेगी। यह पहल धार्मिक आस्था को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का अनूठा प्रयास है।
अपराध से सृजन तक का सफर
केंद्रीय जेल रायपुर में करीब 10 बंदियों ने इन गणेश प्रतिमाओं को तैयार किया है। मेहनत, लगन और रचनात्मकता के जरिए बंदियों ने मिट्टी को भगवान गणेश की आकर्षक प्रतिमाओं का रूप दिया। यह सिर्फ मूर्तियां बनाने का काम नहीं है, बल्कि बंदियों के पुनर्वास और उनके भीतर छिपे हुनर को सकारात्मक दिशा देने की कोशिश भी है।
जेल में चल रही कौशल विकास और उत्पादन गतिविधियों के जरिए बंदियों को अपनी प्रतिभा का इस्तेमाल करने का अवसर दिया जा रहा है। गणेश प्रतिमा निर्माण भी इसी पहल का हिस्सा है।
आस्था के साथ पर्यावरण का संदेश
जेल अधीक्षक रायपुर योगेश सिंह क्षत्री ने कहा कि केंद्रीय जेल में बंदियों के पुनर्वास और आत्मनिर्भरता के लिए लगातार कौशल विकास एवं उत्पादन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि बंदियों द्वारा तैयार की गई बीजयुक्त पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं यह संदेश देती हैं कि आस्था और प्रकृति संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। इस पहल के जरिए बंदियों को अपनी प्रतिभा और कौशल को सकारात्मक दिशा में इस्तेमाल करने का अवसर मिलने के साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी प्रयास किया जा रहा है।
सलाखों के पीछे से समाज के लिए सकारात्मक संदेश
इन गणेश प्रतिमाओं की कहानी सिर्फ मिट्टी, रंग और आकार की नहीं है। यह बदलाव, पुनर्वास और नई शुरुआत की कहानी भी है। जहां कभी इन हाथों से गलतियां हुईं, वहीं अब उन्हीं हाथों से ऐसी प्रतिमाएं आकार ले रही हैं, जो विसर्जन के बाद पौधे बनकर जीवन और हरियाली का संदेश देंगी। अपराध के बाद सुधार की राह पर बढ़ते इन बंदियों की यह पहल बताती है कि सही अवसर मिले तो हुनर को नई दिशा दी जा सकती है।

