GRC Meeting 2026 : छत्तीसगढ़ चेम्बर ने GST की 6 बड़ी समस्याएं उठाईं, वास्तविक खरीदारों के ITC ब्लॉक और 200% पेनल्टी पर जताई आपत्ति

GRC Meeting 2026 : छत्तीसगढ़ चेम्बर ने GST की 6 बड़ी समस्याएं उठाईं, वास्तविक खरीदारों के ITC ब्लॉक और 200% पेनल्टी पर जताई आपत्ति

रायपुर, 16 अक्टूबर 2026। GRC Meeting 2026 : छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने उद्योगों और व्यापारियों से जुड़े जीएसटी के प्रमुख मुद्दों को राज्य स्तरीय शिकायत निवारण समिति (GRC) की चौथी बैठक में प्रमुखता से उठाया। 14 अक्टूबर 2026 को आयोजित बैठक में चेम्बर प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी के मार्गदर्शन और कोषाध्यक्ष निकेश बरड़िया के नेतृत्व में सीजीएसटी भोपाल जोन के मुख्य आयुक्त को ज्ञापन सौंपा। इसमें वास्तविक खरीदारों का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) ब्लॉक करने, ई-वे बिल की मामूली त्रुटियों पर भारी जुर्माना लगाने, चालू उद्योगों के बैंक खाते फ्रीज करने और रिफंड में आ रही परेशानियों सहित छह प्रमुख मुद्दों के समाधान की मांग की गई।

वास्तविक खरीदारों का ITC ब्लॉक करने पर रोक की मांग

चेम्बर ने मांग की कि यदि सप्लाई चेन में किसी पिछले आपूर्तिकर्ता की ओर से टैक्स डिफॉल्ट होता है, तो बैंकिंग माध्यम से भुगतान करने वाले वास्तविक खरीदार या निर्माता का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) ब्लॉक नहीं किया जाना चाहिए। संगठन का कहना है कि ऐसे मामलों में वास्तविक खरीदारों को नोटिस जारी करने के बजाय पहले मूल डिफॉल्टर के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। चेम्बर ने इसे व्यापारियों और विनिर्माण इकाइयों के लिए गंभीर व्यावहारिक समस्या बताया।

ई-वे बिल की छोटी गलती पर 200% पेनल्टी का विरोध

चेम्बर प्रतिनिधिमंडल ने ई-वे बिल में मामूली मानवीय त्रुटि या वाहन खराब होने जैसी परिस्थितियों में माल जब्त करने और भारी जुर्माना लगाने पर आपत्ति जताई। संगठन ने मांग की कि ऐसे मामलों में परिस्थितियों और गलती की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए उचित एवं आनुपातिक कार्रवाई की जाए। ज्ञापन में संबंधित नियमों और सर्कुलर के अनुरूप मामूली त्रुटियों पर ₹500 से ₹1,000 तक की नाममात्र शास्ति लागू करने का सुझाव दिया गया।

प्लास्टिक और विनिर्माण उद्योगों को रिफंड में राहत

प्लास्टिक, पाइप और अन्य विनिर्माण इकाइयों में इनपुट पर अधिक तथा आउटपुट पर कम जीएसटी दर के कारण कार्यशील पूंजी फंसने का मुद्दा भी उठाया गया। चेम्बर ने इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के मामलों में रिफंड प्रक्रिया को स्पष्ट और व्यावहारिक बनाने की मांग की। संगठन के अनुसार, रिफंड व्यवस्था में राहत मिलने से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को नकदी की उपलब्धता बनाए रखने और कारोबार सुचारू रूप से चलाने में मदद मिलेगी।

राइस मिलिंग और बैंक खाते फ्रीज करने के मामलों पर चिंता

चेम्बर ने राइस मिलिंग में कस्टम मिलिंग के दौरान निकलने वाले ब्रान और हस्क जैसे सह-उत्पादों तथा जॉब वर्क पर अलग-अलग अधिकारियों की व्याख्याओं से पैदा हो रही समस्याओं को उठाया। संगठन ने पुराने नोटिसों के समाधान के लिए एक समान दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की। इसके साथ ही प्रारंभिक जांच के दौरान चालू उद्योगों के बैंक खाते फ्रीज करने पर रोक लगाने और बार-बार होने वाले नोटिस एवं ऑडिट से राहत देने के लिए संयुक्त इंटीग्रेटेड ऑडिट व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया।

GSTR-3B विलंब पर अतिरिक्त पेनल्टी और अन्य मांगें

ज्ञापन में GSTR-3B रिटर्न दाखिल करने में देरी के मामलों में लेट फीस के अतिरिक्त जीएसटी अधिनियम की धारा 125 के तहत सामान्य शास्ति के नोटिस जारी करने पर भी आपत्ति जताई गई। चेम्बर ने ऐसे मामलों में नियमों के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने और अनुचित अतिरिक्त पेनल्टी पर रोक लगाने की मांग की। संगठन के अनुसार, इन छह मुद्दों का समाधान होने से स्टील, राइस मिलिंग, प्लास्टिक और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों सहित प्रदेश के व्यापारियों को राहत मिल सकती है।

मुख्य आयुक्त ने दिया सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन

बैठक में सीजीएसटी भोपाल जोन के मुख्य आयुक्त मानस आर. मोहंती, प्रधान आयुक्त पराग सी. बोरकर, संयुक्त आयुक्त अमित चंदेल, अरविंद कुमार, सोनल के. मिश्रा एवं भावना अली सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। राज्य कर विभाग की ओर से आयुक्त पुष्पेंद्र के. मीना और विशेष आयुक्त तरन्नुम वर्मा भी बैठक में शामिल हुए। चेम्बर के अनुसार, मुख्य आयुक्त ने सभी मुद्दों को गंभीरता से सुना और सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश कोषाध्यक्ष निकेश बरड़िया, वाइस चेयरमेन सीए चेतन तरवानी, कार्यकारी अध्यक्ष राजेश वासवानी और सीए विजय गोयल प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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