नई दिल्ली, 17 अक्टूबर 2026। Trump Executive Order October 2026 : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने से जुड़े नए प्रावधानों पर फिलहाल छूट दे दी है। इस फैसले से भारत और चीन जैसे बड़े ऊर्जा खरीदारों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने का तत्काल खतरा टल गया है। व्हाइट हाउस की ओर से 16 अक्टूबर को जारी कार्यकारी आदेश में इस राहत के पीछे अमेरिका के राष्ट्रीय हितों का हवाला दिया गया है। हालांकि, यह छूट रूस से जुड़े सभी पुराने अमेरिकी प्रतिबंधों को समाप्त नहीं करती।
ट्रंप ने क्यों दी नए टैरिफ से छूट?
ट्रंप ने 16 अक्टूबर 2026 को ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट, 2026’ के कई प्रावधानों पर छूट देने का आदेश जारी किया। इस कानून पर उन्होंने 18 सितंबर 2026 को हस्ताक्षर किए थे। कानून के तहत रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और रूसी तेल-गैस खरीदने वाले कुछ देशों के खिलाफ अतिरिक्त शुल्क लगाने की व्यवस्था की गई थी।
कार्यकारी आदेश में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस को प्रमाणित किया है कि फिलहाल इन प्रावधानों से छूट देना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है।
भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ का खतरा कैसे टला?
नए कानून में रूस से आने वाले सामान पर 500 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क और रूसी कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले पांच सबसे बड़े खरीदार देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रावधान शामिल है। यह 100 प्रतिशत शुल्क उन देशों के मामले में लागू हो सकता था, जो 18 अक्टूबर 2026 या उसके बाद जानबूझकर रूसी मूल का तेल या गैस खरीदते।
ट्रंप के नए आदेश में संबंधित शुल्क प्रावधानों पर फिलहाल छूट दे दी गई है। इससे भारत जैसे देशों को तत्काल राहत मिली है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत पर पहले से लागू हर अमेरिकी शुल्क या व्यापारिक प्रतिबंध भी समाप्त हो गया है।
रूसी तेल खरीद पर अमेरिका की निगरानी जारी रहेगी
टैरिफ से छूट मिलने के बावजूद अमेरिकी प्रशासन रूसी तेल और गैस की खरीद पर नजर रखेगा। आदेश के अनुसार, अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव विदेश मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और ऊर्जा मंत्रालय के साथ मिलकर संबंधित गतिविधियों की निगरानी करेंगे और राष्ट्रपति को नियमित जानकारी देंगे।
यदि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां सामने आती हैं जिनमें नए कदम उठाने की जरूरत महसूस होती है, तो प्रशासन मौजूदा छूट में बदलाव करने या आगे कार्रवाई करने पर विचार कर सकता है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि रूस से संबंधित पहले के कुछ कार्यकारी आदेशों के तहत लगाए गए प्रतिबंध इस फैसले से प्रभावित नहीं होंगे।
रूस की मदद करने वाले देशों पर भी नजर
नए कानून में रूस पर लगे तेल प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले पांच प्रमुख देशों या पक्षों पर भी अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रावधान है। हालांकि, इस आदेश के तहत संबंधित शुल्क प्रावधानों पर भी फिलहाल छूट दी गई है।
अमेरिकी प्रशासन आगे की परिस्थितियों का आकलन करेगा। इसलिए मौजूदा राहत को स्थायी रूप से प्रतिबंध समाप्त होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। भविष्य में अमेरिका की नीति में बदलाव होने पर भारत और अन्य ऊर्जा आयातक देशों पर इसका असर पड़ सकता है।
अमेरिका के फैसले का भारत के लिए क्या मतलब?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर अमेरिका की नीति भारत के व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। फिलहाल नए कानून के तहत प्रस्तावित अतिरिक्त टैरिफ से राहत मिलने से तत्काल दबाव कम हुआ है।
हालांकि, रूस से जुड़े पुराने प्रतिबंध, अन्य व्यापारिक शुल्क और भविष्य में अमेरिकी प्रशासन की संभावित कार्रवाई अलग-अलग विषय हैं। इसलिए भारत के लिए आगे भी अमेरिकी फैसलों और वैश्विक ऊर्जा बाजार में होने वाले बदलावों पर नजर रखना महत्वपूर्ण रहेगा।

