रायपुर, 21 अक्टूबर। IPS Video: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में विजयादशमी के अवसर पर शस्त्र पूजन के बाद पुलिस अधीक्षक IPS अंकिता शर्मा की AK-47 से फायरिंग का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। पारंपरिक साड़ी पहनकर राइफल से फायरिंग करतीं एसपी अंकिता शर्मा के इस वीडियो पर भारतीय सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने हथियारों की सुरक्षा और फायरिंग के दौरान अनुशासन को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वायरल वीडियो में अंकिता शर्मा शस्त्र पूजन के बाद AK-47 से हवाई फायरिंग करती नजर आ रही हैं। रिपोर्टों में नौ राउंड फायर किए जाने का भी उल्लेख है। हालांकि, वीडियो में दिखाई देने वाली परिस्थितियों और सुरक्षा संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने कहा
पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने अपनी एक्स पोस्ट में वीडियो में दिखाई देने वाले हथियार संचालन के तरीके पर आपत्ति जताई। उनके अनुसार, लोडेड हथियार को संभालते समय सुरक्षा नियमों, हथियार की दिशा और फायरिंग के दौरान अनुशासन का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने वीडियो में राइफल की दिशा बदलने और आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। उनके मुताबिक, हथियारों के इस्तेमाल में बुनियादी सुरक्षा प्रक्रियाओं की अनदेखी गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है।
X पर एक पोस्ट में, ढिल्लों ने बताया कि वीडियो में एक हथियार को बेहद असुरक्षित तरीके से इस्तेमाल करते हुए देखा जा सकता है। उनके अनुसार, लोड किए गए हथियार को अलग-अलग दिशाओं में तानना, आस-पास मौजूद लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालना, और हथियार संभालने के बुनियादी नियमों का पालन न करना- ये सभी गंभीर चिंता के विषय हैं। उन्होंने इस तरह के मामलों में अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
क्या है पूरा मामला?
विजयादशमी पर राजनांदगांव पुलिस लाइन में शस्त्र पूजन का आयोजन किया गया था। इस दौरान एसपी अंकिता शर्मा भी मौजूद थीं। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में वह पारंपरिक साड़ी पहने AK-47 से फायरिंग करती दिखाई दे रही हैं। वीडियो वायरल होने के बाद यह घटनाक्रम चर्चा का विषय बन गया।
हथियारों की सुरक्षा और अनुशासन पर बहस
इस मामले ने सार्वजनिक कार्यक्रमों में हथियारों के इस्तेमाल के दौरान सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर बहस छेड़ दी है। ढिल्लों ने घटनाक्रम को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की आवश्यकता पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वीडियो का पूरा संदर्भ, फायरिंग की परिस्थितियां और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण है। फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में है।

