जगदलपुर, 23 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ के बस्तर में विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा उत्सव में शामिल हुईं राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने यहां की अनूठी धार्मिक परंपराओं, जनजातीय संस्कृति और सामूहिक आस्था की सराहना की। उन्होंने बस्तर दशहरा को सामाजिक समरसता, सामूहिक सहभागिता और लोकतांत्रिक मूल्यों का जीवंत प्रतीक बताया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि माओवाद से मुक्त बस्तर अब नवनिर्माण और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
कार्यक्रम में बस्तर की परंपराओं को संरक्षित रखने वाले पारंपरिक प्रतिनिधियों के लिए मानदेय बढ़ाने की भी जानकारी दी गई। अब मांझियों को 5,000 रुपये और चालकी को 3,500 रुपये मासिक मानदेय मिलेगा। पहले मांझियों को 2,000 रुपये और चालकी को 1,500 रुपये प्रतिमाह दिए जाते थे।
राष्ट्रपति बोलीं- बस्तर दशहरा सामाजिक एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जगदलपुर में मां दंतेश्वरी की पावन भूमि पर आयोजित बस्तर दशहरा उत्सव में कहा कि लगभग 75 दिनों तक चलने वाला यह पर्व विभिन्न समुदायों को एक सूत्र में बांधता है। रथ निर्माण, रथ खींचने, पूजा-अर्चना और विभिन्न अनुष्ठानों में अलग-अलग गोत्रों तथा समुदायों की भागीदारी इस उत्सव की विशेष पहचान है। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक गौरव और जनजातीय विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं का संरक्षण और सामूहिक सहभागिता इसे विशिष्ट बनाती है।
मुरिया दरबार को बताया लोकतंत्र की जमीनी परंपरा
राष्ट्रपति ने मुरिया दरबार की परंपरा को जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक व्यवस्था का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस परंपरा में समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि एक साथ बैठकर जनसमस्याओं, आवश्यकताओं और सामाजिक विषयों पर चर्चा करते हैं। सामूहिक संवाद से समाधान निकालने की यह परंपरा भारतीय लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करती है। राज्यपाल रमेन डेका ने भी कहा कि बस्तर दशहरा और मुरिया दरबार समाज को साथ लेकर चलने तथा संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान करने की सीख देते हैं।
मांझियों और चालकी के मानदेय में बढ़ोतरी
बस्तर दशहरा के अवसर पर पारंपरिक प्रतिनिधियों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए मानदेय बढ़ाने की जानकारी दी गई। मांझी 2,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये प्रतिमाह। चालकी 1,500 रुपये से बढ़ाकर 3,500 रुपये प्रतिमाह। संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने इसे बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने वाले पारंपरिक प्रतिनिधियों के योगदान के प्रति सम्मान बताया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले- अब बस्तर में नवनिर्माण और विकास की बारी
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए कहा कि बस्तर हिंसक माओवाद से मुक्त होकर नवनिर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों को जनजातीय संस्कृति और युवाओं की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने वाला माध्यम बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए काम कर रही है। नियद नेल्लानार योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और पीएम-जनमन योजना के माध्यम से अंदरूनी बसाहटों को सड़क संपर्क से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के जरिए परिवहन सुविधाओं का विस्तार भी किया जा रहा है।
रेल, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने बस्तर में विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि रायपुर से रावघाट तक नई रेल सेवा शुरू की गई है और रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन पर काम जारी है। रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेसवे का बड़ा हिस्सा बस्तर क्षेत्र से गुजरता है। उन्होंने कहा कि जगदलपुर में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल शुरू किया गया है, जबकि गीदम में मेडिकल कॉलेज इसी शैक्षणिक सत्र से शुरू हुआ है। ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित करने का काम भी किया जा रहा है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होम-स्टे और वनोपज संग्राहकों को उचित मूल्य दिलाने के लिए वन धन केंद्रों के माध्यम से प्रयास किए जा रहे हैं।
जनजातीय युवाओं की प्रतिभा और प्रकृति संरक्षण पर जोर
राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समाज में अपार प्रतिभा और संभावनाएं हैं। उचित अवसर, प्रोत्साहन और संसाधन मिलने पर जनजातीय युवा खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में देश का नाम रोशन कर सकते हैं। उन्होंने बस्तर ओलंपिक में युवाओं की भागीदारी की सराहना की। उन्होंने जनजातीय समाज की प्रकृति पूजा की परंपरा का उल्लेख करते हुए जंगलों, पहाड़ों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर जोर दिया। राष्ट्रपति ने अधिक से अधिक पौधरोपण करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण सुरक्षित रखने का आह्वान किया। राष्ट्रपति ने बस्तर की सांस्कृतिक स्मृतियों में दंडकारण्य और रामायण से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख करते हुए माता शबरी की भक्ति तथा भगवान श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा लेने की बात कही।
27 अक्टूबर को मां दंतेश्वरी और देवी मावली की डोली विदाई
राष्ट्रपति ने बस्तर दशहरा की पारंपरिक रस्मों का उल्लेख करते हुए कुटुम्ब जात्रा और 27 अक्टूबर को मां दंतेश्वरी तथा देवी मावली की डोली विदाई जैसे आयोजनों को उत्सव की विशिष्ट धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं का परिचायक बताया। उन्होंने बस्तरवासियों के उज्ज्वल भविष्य और छत्तीसगढ़ की प्रगति की कामना की। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री राम विचार नेताम, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, बस्तर सांसद महेश कश्यप, कांकेर सांसद भोजराज नाग, विधायक किरण सिंह देव, विधायक लता उसेंडी और अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। राज्य प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, पारंपरिक मांझी-चालकी तथा बस्तर दशहरा समिति के सदस्य भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

