रायपुर, 04 नवंबर। CG Employees Cashless Treatment: छत्तीसगढ़ के लाखों शासकीय कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवारों के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए नई व्यवस्था लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने ‘छत्तीसगढ़ राज्य के शासकीय सेवकों एवं उनके आश्रितों हेतु कैशलेस चिकित्सा सुविधा (संचालन एवं क्रियान्वयन) दिशा-निर्देश, 2026’ जारी कर दिए हैं। नई व्यवस्था के तहत पात्र शासकीय कर्मचारी और उनके आश्रित सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में भर्ती होकर बिना नकद भुगतान के इलाज करा सकेंगे। इससे कर्मचारियों को इलाज के लिए पहले अपनी जेब से बड़ी रकम खर्च करने और बाद में मेडिकल बिलों की प्रतिपूर्ति के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी।
अब पहले इलाज, बाद में बिल प्रतिपूर्ति का झंझट खत्म
अब तक छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (चिकित्सा परिचर्या) नियम, 2013 के तहत कर्मचारियों को इलाज का खर्च पहले स्वयं उठाना पड़ता था। इसके बाद मेडिकल बिल जमा कराकर राशि की प्रतिपूर्ति लेनी होती थी। नई कैशलेस व्यवस्था लागू होने पर पात्र कर्मचारियों को इस प्रक्रिया से काफी राहत मिलेगी।
ई-हेल्थ कार्ड से होगा कर्मचारियों और आश्रितों का सत्यापन
योजना के तहत पात्रता की पुष्टि ई-हेल्थ कार्ड के माध्यम से की जाएगी। शासकीय कर्मचारियों की पहचान Employee ID से होगी, जबकि आश्रितों का सत्यापन आधार सहित जरूरी दस्तावेजों के आधार पर किया जाएगा। इसके लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के सहयोग से डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा। योजना के संचालन में आयुष्मान भारत के डिजिटल मॉड्यूल का भी उपयोग किया जाएगा।
IPD इलाज पर मिलेगी कैशलेस सुविधा, OPD के नियम रहेंगे अलग
नई व्यवस्था के तहत मुख्य रूप से अस्पताल में भर्ती होकर कराए जाने वाले उपचार यानी IPD (In-Patient Department) में कैशलेस सुविधा मिलेगी। वहीं सामान्य ओपीडी (OPD) उपचार पहले की तरह निर्धारित नियमों के तहत मेडिकल खर्च की प्रतिपूर्ति के दायरे में रहेगा।
इलाज की भुगतान सीमा भी तय, अतिरिक्त खर्च कर्मचारी को देना होगा
दिशा-निर्देशों के अनुसार उपचार के भुगतान की सीमा CGHS की बी-1 श्रेणी के शहरों में निर्धारित पैकेज दरों या अस्पताल के वास्तविक खर्च, दोनों में से जो भी कम होगा, उसके आधार पर तय की जाएगी। निर्धारित सीमा से अधिक होने वाले खर्च की जिम्मेदारी संबंधित कर्मचारी की होगी।
शिकायत के लिए 24 घंटे टोल फ्री कॉल सेंटर
योजना के बेहतर संचालन और कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए 24 घंटे टोल-फ्री कॉल सेंटर और ऑनलाइन शिकायत पोर्टल की व्यवस्था भी की जाएगी। इससे इलाज के दौरान कैशलेस सुविधा से जुड़ी समस्याओं का समाधान कराने में मदद मिलेगी।
ई-हेल्थ कार्ड और अस्पतालों की सूची का इंतजार
सरकार की ओर से दिशा-निर्देश जारी होने के बाद अब कर्मचारियों की नजर ई-हेल्थ कार्ड जारी होने, डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू होने और सूचीबद्ध अस्पतालों की सूची पर रहेगी। इन व्यवस्थाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के बाद छत्तीसगढ़ के शासकीय कर्मचारियों और उनके आश्रितों को इलाज के लिए बड़ी आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।

