Solar Eclipse 2026 : साल का पहला सूर्य ग्रहण इस दिन…! 2 घंटे से ज्यादा चलेगा खगोलीय रहस्य…भारत पर रहेगा असर…? नोट करें डेट और टाइमिंग

Solar Eclipse 2026 : साल का पहला सूर्य ग्रहण इस दिन…! 2 घंटे से ज्यादा चलेगा खगोलीय रहस्य…भारत पर रहेगा असर…? नोट करें डेट और टाइमिंग

नई दिल्ली, 25 जनवरी। Solar Eclipse 2026 : सूर्य ग्रहण को खगोलीय और धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष 2026 का पहला सूर्य ग्रहण मंगलवार, 17 फरवरी 2026 को लगेगा। यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसे आमतौर पर ‘रिंग ऑफ फायर’ के नाम से जाना जाता है।

वलयाकार सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य के सामने तो आता है, लेकिन उसे पूरी तरह ढक नहीं पाता। इस स्थिति में सूर्य के किनारों पर रोशनी का एक चमकदार गोल घेरा बन जाता है, जो देखने में बेहद आकर्षक और अद्भुत होता है।

बनता है रिंग ऑफ फायर

नासा के अनुसार, जब चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी से अपेक्षाकृत अधिक दूरी पर होता है और उसी समय सूर्य के सामने आ जाता है, तब वह सूर्य को पूरी तरह ढकने में असमर्थ रहता है। परिणामस्वरूप, सूर्य की रोशनी चंद्रमा के चारों ओर एक उज्ज्वल वलय के रूप में दिखाई देती है, जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है।

यह वलयाकार सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। यानी देश के लोग इस खगोलीय घटना का प्रत्यक्ष रूप से नजारा नहीं देख पाएंगे। हालांकि, दुनिया के कई अन्य हिस्सों में यह ग्रहण साफ तौर पर दिखाई देगा।

सूर्य ग्रहण का समय (भारतीय समयानुसार)

ग्रहण की शुरुआत (आंशिक चरण): शाम 3:26 बजे।

वलयाकार चरण की शुरुआत: शाम 5:12 बजे।

ग्रहण का चरम समय: शाम 5:42 बजे।

ग्रहण की समाप्ति: शाम 7:57 बजे।

पूरे ग्रहण की अवधि लगभग 2 घंटे से अधिक रहेगी।

कहां दिखाई देगा सूर्य ग्रहण?

यह सूर्य ग्रहण दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका के कुछ हिस्सों, अटलांटिक महासागर और आसपास के क्षेत्रों में देखा जा सकेगा। इन स्थानों पर लोग ‘रिंग ऑफ फायर’ का शानदार दृश्य प्रत्यक्ष रूप से देख पाएंगे।

भारत में नहीं लगेगा सूतक काल

चूंकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, इसलिए देश में सूतक काल मान्य नहीं होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल तभी लागू होता है जब ग्रहण किसी स्थान पर दिखाई दे। ऐसे में भारत में पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक कार्य सामान्य रूप से किए जा सकेंगे।

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