National Vector-Borne Disease Control कार्यक्रम के तहत जिले को डेंगू मुक्त बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रभावी पहल, विभाग की अपील, डेंगू के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में कराएं जांच

National Vector-Borne Disease Control कार्यक्रम के तहत जिले को डेंगू मुक्त बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रभावी पहल, विभाग की अपील, डेंगू के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में कराएं जांच

रायगढ़, 02 जुलाई। National Vector-Borne Disease Control : राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत जिले को डेंगू मुक्त बनाने की दिशा में प्रभावी पहल किए जा रहे है। इसके तहत मौसम पूर्व तैयारियों को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा सतत अभियान संचालित किया जा रहा है। पूर्व वर्षों में बड़ी सफलता के बाद वर्ष 2026 में “शून्य डेंगू” लक्ष्य पर काम जारी है। लार्वा नियंत्रण, फॉगिंग और जनजागरूकता पर विशेष फोकस किया जा रहा है। साथ ही स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करते हुए अस्पतालों में विशेष डेंगू वार्ड तैयार किए गए हैं।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत ने बताया कि वर्ष 2026 में डेंगू नियंत्रण को पूर्णतः प्रभावी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विभागीय प्रयासों के परिणामस्वरूप वर्ष 2024 में जहां 1968 डेंगू प्रकरण दर्ज किए गए थे, वहीं वर्ष 2025 में यह घटकर मात्र 30 रह गए। वर्तमान वर्ष 2026 में अब तक की स्थिति में डेंगू नियंत्रण लगभग पूर्ण नियंत्रण की ओर है, जो विभागीय सतर्कता एवं समन्वित प्रयासों का परिणाम है। पिछले वर्ष डेंगू मौसम से पूर्व ही स्वास्थ्य विभाग को विस्तृत तैयारियों के निर्देश दिए गए थे। इसके तहत नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की गईं तथा फॉगिंग, टेमिफॉस एवं बीटीआई के छिड़काव, स्रोत नियंत्रण गतिविधियों एवं व्यापक जन-जागरूकता अभियानों को प्राथमिकता दी गई। इन निर्देशों के अनुरूप स्वास्थ्य विभाग एवं नगर निगम ने संयुक्त रूप से अभियान चलाकर प्रत्येक वार्ड में सक्रिय कार्य किया।

नगर निगम रायगढ़ द्वारा वार्ड स्तर पर स्वच्छता अभियान, नियमित फॉगिंग, लार्वानाशक दवा का छिड़काव तथा पोस्टर वितरण जैसे कार्य किए गए। कचरा वाहनों के माध्यम से डेंगू से बचाव संबंधी संदेशों का प्रसार भी किया गया, जिससे आमजन में जागरूकता बढ़ी। वहीं मितानिन कार्यक्रम के माध्यम से घर-घर लार्वा सर्वे, स्रोत नियंत्रण एवं जनजागरूकता गतिविधियों को प्रभावी रूप से संचालित किया गया। स्वास्थ्य विभाग द्वारा ब्रिडिंग चेकर्स के माध्यम से डेंगू के लार्वा की पहचान कर टेमिफॉस का छिड़काव किया गया तथा प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल नियंत्रणात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की गई। जिन क्षेत्रों में लगातार लार्वा पाए गए, वहां नगर निगम के सहयोग से चालानी कार्यवाही भी की गई, जिससे स्वच्छता के प्रति सख्ती और जागरूकता दोनों में वृद्धि हुई। पूर्व वर्षों की सफलताओं को आधार बनाते हुए इस वर्ष भी स्वास्थ्य विभाग एवं समस्त सहयोगी विभाग पूर्ण समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं, जिससे रायगढ़ जिले को डेंगू मुक्त बनाने की दिशा में ठोस एवं प्रभावी परिणाम प्राप्त हो सके।

जिला अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज रायगढ़ में डेंगू मरीजों हेतु विशेष वार्ड, मच्छरदानी सुविधा तथा उपचार की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। सभी शासकीय एवं निजी अस्पतालों में डेंगू जांच एवं उपचार की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं तथा पॉजिटिव केस की तत्काल सूचना स्वास्थ्य विभाग को देने के निर्देश दिए गए हैं ताकि समय पर उपचार सुनिश्चित किया जा सके। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत ने कहा कि डेंगू नियंत्रण केवल प्रशासनिक प्रयासों से संभव नहीं है, इसमें जनसहभागिता अत्यंत आवश्यक है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे अपने घर एवं आसपास स्वच्छता बनाए रखें तथा किसी भी प्रकार के जलजमाव को तुरंत समाप्त करें।

डेंगू के लक्षण एवं बचाव के उपाय

डेंगू के लक्षणों में अचानक तेज बुखार, सिर दर्द, मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द, आंखों के पीछे दर्द, जी मिचलाना, उल्टी, त्वचा पर चकत्ते तथा गंभीर स्थिति में नाक, मुंह एवं मसूड़ों से रक्तस्राव शामिल हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराना आवश्यक है तथा स्वयं उपचार नहीं करना चाहिए। डेंगू के मच्छर स्थिर एवं साफ पानी में पनपते हैं, इसलिए घर एवं आसपास जलजमाव रोकना अत्यंत आवश्यक है। कूलर, पानी की टंकी, फ्रिज ट्रे, पशु-पक्षियों के जलपात्र आदि को सप्ताह में एक बार खाली कर सुखाना चाहिए। नारियल खोल, टूटे बर्तन एवं टायरों में पानी जमा न होने दें। घरों में दरवाजों एवं खिड़कियों पर जाली/परदे लगाना, पूरी आस्तीन के कपड़े पहनना तथा आसपास गड्ढों को मिट्टी से भरना भी आवश्यक बचाव उपाय हैं।

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छत्तीसगढ स्वास्थ्य