रायपुर, 23 अगस्त। Black Currency fraud Gang: राजधानी रायपुर पुलिस की एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट ने एक बड़े अंतरराज्यीय ‘ब्लैक करेंसी’ ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने पुणे के खंडाला स्थित एक रिसॉर्ट में दबिश देकर 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपी एक व्यक्ति को रकम दोगुनी करने का झांसा देकर करोड़ों रुपये ठगने की तैयारी में थे। मौके से 4 करोड़ रुपये से अधिक नकदी, 17 मोबाइल फोन, नोट के आकार के काले कागज, कांच की प्लेट्स, केमिकल और अन्य सामग्री बरामद की गई है।

2005 से चल रहा था ठगी का नेटवर्क
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह वर्ष 2005 से सक्रिय था और देश के अलग-अलग हिस्सों में 100 से अधिक लोगों को ठगी का शिकार बना चुका है। पुलिस के मुताबिक गिरोह ने अरबों रुपये की ठगी की है। रायपुर में भी इसी गिरोह ने एक व्यक्ति को रकम दोगुनी करने का झांसा देकर 1.13 करोड़ रुपये ठगे थे।
पुराने आरोपियों से मिला बड़ा सुराग
तेलीबांधा थाने में दर्ज ठगी के मामले की जांच के दौरान पुलिस ने पहले कनिज फातमा उर्फ भावना पांडेय और दीपिका पॉलीवाल को गिरफ्तार किया था। इनके मोबाइल फोन से मिले चैट, संपर्क नंबर, सोशल मीडिया अकाउंट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का तकनीकी विश्लेषण किया गया। इसी जांच से पुलिस को गिरोह के अन्य सदस्यों की जानकारी मिली और उनकी लोकेशन पुणे में ट्रेस हुई। इसके बाद एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और तेलीबांधा पुलिस की संयुक्त टीम पुणे रवाना हुई।
एक सप्ताह तक निगरानी, फिर रिसॉर्ट में छापा
पुलिस टीम ने पुणे में करीब एक सप्ताह तक आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखी। इसी दौरान खंडाला के एक रिसॉर्ट में गिरोह के सदस्यों की मौजूदगी की पुष्टि हुई। पुलिस ने अचानक दबिश दी तो आरोपी एक व्यक्ति को रकम दोगुनी करने का झांसा देकर ठगी की तैयारी करते मिले।
पुलिस के अनुसार पीड़ित वाराणसी का रहने वाला है और करोड़ों रुपये लेकर रिसॉर्ट पहुंचा था। रकम दोगुनी करने के लालच में वह आरोपियों को पैसे सौंप चुका था। इसी दौरान पुलिस ने आरोपियों को पकड़ लिया। सभी आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर लाकर पूछताछ की जा रही है।
‘वॉश-वॉश’ के नाम पर करते थे करोड़ों की ठगी
पुलिस के मुताबिक आरोपी ‘वॉश-वॉश’ (Wash & Wash) पद्धति का इस्तेमाल करते थे। वे नोट के आकार के काले कागजों को विशेष केमिकल से धोकर असली नोट में बदलने का झूठा प्रदर्शन करते थे। शुरुआत में कुछ असली नोटों पर रासायनिक प्रक्रिया का दिखावा कर पीड़ित का भरोसा जीता जाता था। इसके बाद विदेशी केमिकल, हाई-पावर केमिकल, अधिकारियों की अनुमति और फंड रिलीज जैसी अलग-अलग प्रक्रियाओं का हवाला देकर पीड़ित से कई किश्तों में बड़ी रकम वसूली जाती थी। पैसे मिलते ही आरोपी फरार हो जाते और पीड़ित के हाथ काले कागज ही लगते थे।
‘डी कंपनी’ से कनेक्शन बताकर बनाते थे दबाव
पुलिस के अनुसार आरोपी खुद को ‘डी ग्रुप कंपनी’ यानी दाऊद ग्रुप से जुड़ा बताकर पीड़ितों पर प्रभाव जमाने की कोशिश करते थे। बड़े नेताओं और फिल्मी कलाकारों के साथ फोटो दिखाकर खुद को प्रभावशाली बताया जाता था। गिरोह के प्रमुख सदस्य निजी गनमैन भी रखते थे। पीड़ितों को दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और नागपुर जैसे शहरों के बड़े होटलों में बुलाकर विश्वास में लिया जाता और कम समय में रकम दोगुनी करने का लालच दिया जाता था।
गिरफ्तार किए गए 7 आरोपी
गिरफ्तार आरोपियों में ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ योगी, प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ कैप्टन उर्फ शेट्टी उर्फ रेड्डी, मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ बड़े सर, विवेक सिंह, शुभम पांडेय, योगेन्द्र चौहान और बालमुकुंद दीक्षित शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक गिरोह के कुछ अन्य सदस्य अभी फरार हैं। उनकी पहचान और गिरफ्तारी के लिए जांच जारी है।


