काठमांडू/ग्यिरोंग, 29 अगस्त। Kailash Mansarovar Yatra: नेपाल और तिब्बत क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ और जलप्रलय ने भारी तबाही मचा दी है। शुक्रवार शाम तक कम से कम 584 लोगों की मौत की सूचना है, जबकि 2,482 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हालात इतने भयावह हैं कि चीन-नेपाल सीमा के पास बाढ़ के दो दिन बाद भी ईशा फाउंडेशन के 77 तीर्थयात्रियों के ठिकाने का कोई पता नहीं चल सका है।
जानकारी के अनुसार, मृतकों में नेपाल में 579 लोगों की मौत और 1,924 लोगों के लापता होने की बात सामने आई है। वहीं, तिब्बत क्षेत्र में 5 लोगों की मौत और 558 लोगों के लापता होने की सूचना है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर था 77 सदस्यीय समूह
लापता हुआ 77 सदस्यीय दल आध्यात्मिक गुरु जग्गी वासुदेव (सद्गुरु) द्वारा स्थापित ईशा फाउंडेशन के नेतृत्व में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया था। भीषण बाढ़ के बाद से इस समूह से संपर्क टूट गया है। ईशा फाउंडेशन की ओर से बताया गया कि पिछले दो दिनों से लापता तीर्थयात्रियों को लेकर कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी है। बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं, लेकिन अब तक उनके ठिकाने का पता नहीं चल पाया है।
नेपाल में 538 शव बरामद होने की भी रिपोर्ट
नेपाल पुलिस के अनुसार विभिन्न प्रभावित जिलों से बड़ी संख्या में शव बरामद किए गए हैं। इनमें नवलपरासी पूर्व से 134, चितवन से 221, गोरखा से 46 और नुवाकोट से 37 शव शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा धाडिंग से 33, तनहुं से 28, नवलपरासी पश्चिम से 27 और रसुवा से 12 शव बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों का कहना है कि हालात लगातार बदल रहे हैं और लापता लोगों की संख्या में और वृद्धि हो सकती है।
7,451 सुरक्षाकर्मी मैदान में, टनलों में भी सर्च ऑपरेशन
आपदा के तीसरे दिन भी खोज और बचाव अभियान जारी रहा। राहत कार्यों में 7,451 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है, जिनमें 2,391 नेपाल सेना के जवान भी शामिल हैं। कई इलाकों में लोग अब भी संपर्क से कटे हुए हैं। टनलों और दुर्गम क्षेत्रों में भी सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
बैरियर लेक ओवरफ्लो, नई लहर से पीछे हटीं बचाव टीमें
शुक्रवार को हालात उस समय और खतरनाक हो गए, जब एक अस्थिर बैरियर लेक के ओवरफ्लो होने से भोटे कोशी नदी में नई लहर आ गई। इसके चलते बचाव टीमों को कुछ इलाकों से पीछे हटना पड़ा। इसके बाद एक और एवलांच में करीब 50,000 क्यूबिक मीटर बर्फ और मलबा गिरने की सूचना है। सैटेलाइट तस्वीरों में ऊपर की ओर एक और बड़ी झील बनती दिखाई देने की बात कही गई है, जिसका कोई स्पष्ट आउटलेट नजर नहीं आ रहा। इससे प्रभावित क्षेत्रों में खतरा और बढ़ गया है।
77 परिवारों को अपनों का इंतजार
ईशा फाउंडेशन की मां गम्भीरी ने कहा कि लापता 77 तीर्थयात्रियों को लेकर पिछले दो दिनों से कोई अपडेट नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि 77 परिवार अपने प्रियजनों के बारे में जानकारी का इंतजार कर रहे हैं और यह समय उनके लिए गहरे भावनात्मक संकट का है। बताया गया कि सद्गुरु आपदा के केंद्र ग्यिरोंग जाकर राहत कार्यों में मदद करना चाहते थे, लेकिन उन्हें जरूरी मंजूरी नहीं मिल सकी।
19 देशों के लोग शामिल
लापता समूह में 19 देशों के प्रतिभागी शामिल बताए गए हैं। इनमें 22 अमेरिका, 12 कनाडा, 11 ऑस्ट्रेलिया, 9 ब्रिटेन, 4 जर्मनी तथा 3-3 फ्रांस और नेपाल के नागरिक शामिल हैं। अन्य देशों के प्रतिभागी भी इस समूह का हिस्सा बताए गए हैं। ईशा फाउंडेशन ने लापता तीर्थयात्रियों की तलाश के लिए भारत, चीन और नेपाल के दूतावासों तथा संबंधित मंत्रालयों से संपर्क कर मदद की अपील की है। फिलहाल बचाव अभियान जारी है और सैकड़ों परिवार अपने लापता परिजनों की सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

