रायपुर, 07 अक्टूबर। Chhattisgarh Land Use Rules: छत्तीसगढ़ में भूमि उपयोग यानी Land Use से जुड़े करीब 42 साल पुराने नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। आवास एवं पर्यावरण विभाग ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में संशोधन कर नई व्यवस्था लागू की है। दावा-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संशोधित प्रावधानों को राजपत्र में प्रकाशित कर दिया गया है।
सरकार के मुताबिक इस बदलाव का उद्देश्य भूमि उपयोग से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सरल, स्पष्ट और लचीला बनाना है। पुराने नियमों में अलग-अलग गतिविधियों को लेकर कई प्रक्रियाएं और प्रावधान होने के कारण लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। नई व्यवस्था में नियमन को अधिक व्यावहारिक बनाने पर जोर दिया गया है।
सरकार का फोकस- सरल नियम और कम अनुपालन बोझ
आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी के मुताबिक मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा थी कि लैंड यूज से जुड़े सुधार जल्द लागू किए जाएं। इसी दिशा में नियमों में बदलाव किया गया है।
नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल नियमन को कम करना नहीं, बल्कि उसे स्पष्ट, सरल और बदलती जरूरतों के अनुरूप बनाना है। इससे भूमि उपयोग से जुड़ी प्रक्रियाओं में अनावश्यक पेचीदगियां कम करने और विकास गतिविधियों को गति देने में मदद मिलने की उम्मीद है।
नई अर्थव्यवस्था के हिसाब से जमीन के इस्तेमाल की गुंजाइश
तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था में नई तरह की सेवाएं, संस्थाएं, व्यवसाय और तकनीकी गतिविधियां सामने आ रही हैं। ऐसे में पहले से तय गतिविधियों की सीमित सूची के बजाय स्पष्ट प्रतिबंधों के भीतर व्यापक गुंजाइश देने की व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक माना जा रहा है। इससे निवेश, रोजगार और स्थानीय विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में मदद मिल सकती है।
आवासीय से औद्योगिक जमीन तक अलग-अलग व्यवस्था
संशोधित नियमों में विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों के लिए गतिविधियों का स्पष्ट वर्गीकरण किया गया है। इनमें मुख्य रूप से, आवासीय भूमि उपयोग, वाणिज्यिक भूमि उपयोग, औद्योगिक भूमि उपयोग, सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक भूमि उपयोग, परिवहन भूमि उपयोग, मनोरंजन/आमोद-प्रमोद भूमि उपयोग, कृषि भूमि उपयोग शामिल हैं। इस वर्गीकरण का उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों की प्रकृति और जरूरत के अनुसार भूमि उपयोग व्यवस्था को अधिक स्पष्ट बनाना है।
आम आदमी और निवेशकों को क्या फायदा?
नई व्यवस्था से भूमि उपयोग से संबंधित नियमों को समझना और उनके अनुसार विकास गतिविधियों की योजना बनाना आसान होने की उम्मीद है। खास तौर पर शहरों और कस्बों के विस्तार के साथ आवास, व्यापार, सेवाओं, संस्थागत गतिविधियों और अधोसंरचना की जरूरतें लगातार बदल रही हैं। सरकार का मानना है कि सरल नियम और कम अनुपालन बोझ विकास परियोजनाओं को गति देने के साथ निवेश के लिए भी अधिक स्पष्ट वातावरण तैयार कर सकते हैं।
1984 के नियमों में क्यों करना पड़ा बदलाव?
1984 में बनाए गए भूमि विकास नियम उस समय की विकास जरूरतों के अनुरूप तैयार किए गए थे। पिछले चार दशकों में शहरों, कस्बों, उद्योगों, सेवाओं और कारोबार के स्वरूप में बड़ा बदलाव आया है। नई व्यवस्था इसी बदलते परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए भूमि उपयोग नियमन को अधिक व्यावहारिक और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने की दिशा में कदम है।
राजपत्र में क्या हुआ प्रकाशित?
दावा-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संशोधित भूमि उपयोग व्यवस्था को राजपत्र में प्रकाशित कर दिया गया है। इसमें अलग-अलग भूमि उपयोग श्रेणियों के तहत गतिविधियों से संबंधित प्रावधान निर्धारित किए गए हैं।
कैटेगरी-वाइज क्या प्रावधान किए गए हैं?
आवासीय: आवासीय क्षेत्र की प्रकृति और सुरक्षा के अनुरूप गतिविधियों को प्राथमिकता।
वाणिज्यिक: व्यापारिक गतिविधियों के लिए स्पष्ट भूमि उपयोग व्यवस्था और असंगत गतिविधियों पर नियंत्रण।
औद्योगिक: उद्योगों के लिए निर्धारित उपयोग तथा असंगत और संवेदनशील गतिविधियों पर प्रतिबंध।
सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक: संस्थागत और सार्वजनिक सेवाओं के अनुरूप भूमि उपयोग।
परिवहन: परिवहन से जुड़ी गतिविधियों के लिए स्पष्ट प्रावधान।
मनोरंजन: आमोद-प्रमोद और मनोरंजन से जुड़ी गतिविधियों के लिए निर्धारित उपयोग।
कृषि: कृषि भूमि पर असंगत और अत्यधिक घनत्व वाली विकास गतिविधियों पर नियंत्रण।
निवेश और विकास को मिल सकती है गति
भूमि उपयोग नियमन में बदलाव को राज्य में नियोजित विकास, निवेश और नई गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है। इससे शहरों और कस्बों में बदलती जरूरतों के अनुरूप विकास की संभावनाओं को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सरकार के अनुसार नई व्यवस्था का उद्देश्य विकास और आवश्यक प्रतिबंधों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए भूमि उपयोग नियोजन को अधिक स्पष्ट और व्यावहारिक बनाना है।
एक नजर में
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| पुराने नियम | छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 |
| बदलाव | भूमि उपयोग व्यवस्था में संशोधन |
| वर्तमान स्थिति | राजपत्र में प्रकाशन |
| प्रमुख उद्देश्य | सरल, स्पष्ट और लचीला नियमन |
| प्रमुख क्षेत्र | आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक, कृषि आदि |
| संभावित लाभ | कम अनुपालन बोझ, आसान नियोजन |
| फोकस | निवेश, रोजगार और विकास |
| संबंधित विभाग | आवास एवं पर्यावरण विभाग |
| मंत्री | ओपी चौधरी |
| राज्य | छत्तीसगढ़ |
अब राजपत्र में कैटेगरी-वाइज क्या-क्या प्रावधान किए गए हैं, इसकी पूरी जानकारी नीचे देखें।

