Korba Elephant Terror: कोरबा में 52 हाथियों का आतंक! खपरैल की छत पर खाट डालकर सो रहा ग्रामीण; हॉस्टल के 160 बच्चों की सुरक्षा पर चिंता

Korba Elephant Terror: कोरबा में 52 हाथियों का आतंक! खपरैल की छत पर खाट डालकर सो रहा ग्रामीण; हॉस्टल के 160 बच्चों की सुरक्षा पर चिंता

कोरबा, 12 अक्टूबर। Korba Elephant Terror: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में हाथियों की मौजूदगी से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। कटघोरा वन मंडल के पसान रेंज में करीब 52 हाथियों का दल जंगल से निकलकर गांवों के आसपास घूम रहा है। हाथियों की आवाजाही से ग्रामीण दिन और रात दहशत में गुजार रहे हैं। डर का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक ग्रामीण ने हाथियों से बचने के लिए खपरैल की छत पर ही अपनी खाट डाल दी है। वहीं, तेलियामार गांव स्थित दीपक स्कूल के हॉस्टल की बाउंड्रीवॉल टूटने के बाद वहां रहकर पढ़ाई करने वाले 160 बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।

पसान रेंज में 52 हाथियों का मूवमेंट, फसलों को नुकसान

पसान से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर पेंड्रा रोड मुख्य मार्ग के किनारे तेलियामार गांव है। यहां से करीब तीन किलोमीटर आगे कुम्हारी सानी गांव के बाद मरवाही वन मंडल की सीमा शुरू होती है। इस क्षेत्र के आसपास जंगलों में 52 हाथियों का दल घूम रहा है। हाथियों की आवाजाही के कारण ग्रामीणों में भय का माहौल है। हाथी रोजाना धान की फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। शाम होते ही हाथियों का दल सड़क पार कर दूसरे जंगल की ओर चला जाता है, जबकि एक दंतैल हाथी के कभी भी गांव में घुस आने की आशंका बनी रहती है।

हाथियों के डर से छत पर खाट डालकर सो रहा ग्रामीण

हाथियों के खौफ के कारण ग्रामीण रात में भी चैन से नहीं सो पा रहे हैं। कई ग्रामीण रातभर जागकर निगरानी करने को मजबूर हैं। इसी डर के बीच ग्रामीण खेलन सिंह ने अपने घर की खपरैल वाली छत पर ही खाट रख ली है। हालांकि, छत पर सोने का यह तरीका जोखिम भरा हो सकता है। यदि हाथी घर की दीवार तोड़ दे या मकान को नुकसान पहुंचाए, तो ग्रामीण के लिए सुरक्षित निकलना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में हाथियों से बचने के लिए असुरक्षित उपाय अपनाने के बजाय वन विभाग की सलाह और सुरक्षित स्थानों पर जाने को प्राथमिकता देना जरूरी है।

हॉस्टल की बाउंड्रीवॉल टूटी, 160 बच्चों की सुरक्षा पर चिंता

तेलियामार गांव में दीपक स्कूल (मिशन) के हॉस्टल में प्राइमरी और मिडिल स्कूल के करीब 160 बच्चे रहकर पढ़ाई करते हैं। जानकारी के मुताबिक, दो दिन पहले हाथियों ने हॉस्टल की बाउंड्रीवॉल तोड़ दी थी। इस घटना के बाद बच्चों के परिजन चिंतित हैं। प्रताप चंद्र साहू के मुताबिक, हॉस्टल में 10 से 14 वर्ष की उम्र के बच्चे रहते हैं। फादर किशोर एक्का ने भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिजनों से चर्चा की है। बच्चों की सुरक्षा इस समय सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है।

सुरक्षा की मांग लेकर पसान थाने पहुंचे ग्रामीण

हाथियों की आवाजाही और सुरक्षा को लेकर चिंतित ग्रामीण रविवार को पसान थाने पहुंचे। ग्रामीण बालक सिंह तंवर और सकुल सिंह ने बताया कि हाथियों के डर से उन्हें रातभर जागना पड़ रहा है। थाना प्रभारी सुरेंद्र यादव ने ग्रामीणों को समझाइश दी कि हाथियों से दूरी बनाए रखें और उनके नजदीक जाने या उन्हें भगाने की कोशिश न करें।

थर्मल ड्रोन से निगरानी, गांवों में मुनादी

कटघोरा वन मंडल की टीमें हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही हैं। रेंजर मनीष सिंह के अनुसार, हाथियों की निगरानी के लिए थर्मल ड्रोन कैमरे की मदद ली जा रही है। धान की फसल और मकानों को हुए नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है। कटघोरा के डीएफओ जितेंद्र उपाध्याय ने बताया कि हाथियों की 24 घंटे निगरानी के लिए अलग-अलग टीमें तैनात हैं। आसपास के गांवों में कोटवार के माध्यम से रोज मुनादी कराई जा रही है, ताकि ग्रामीणों को हाथियों की मौजूदगी और संभावित खतरे के बारे में जानकारी मिलती रहे।

ग्रामीणों के सामने सुरक्षा की चुनौती

पसान रेंज में हाथियों की मौजूदगी ने ग्रामीणों की रातों की नींद छीन ली है। एक ओर धान की फसल और मकानों को नुकसान का खतरा है, तो दूसरी ओर हॉस्टल में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिजन चिंतित हैं। ऐसे में वन विभाग की निगरानी, समय पर चेतावनी और ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की व्यवस्था अहम है।

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