कोलकाता, 09 मई। BJP ka Masterstroke : पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव करते हुए भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार सत्ता हासिल कर ली है। ममता बनर्जी के मजबूत किले को ढहाने के बाद अब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में BJP ने नई कैबिनेट के जरिए साफ संकेत दिया है कि पार्टी अब केवल हिंदुत्व या ध्रुवीकरण की राजनीति नहीं, बल्कि ‘सोशल इंजीनियरिंग’ और ‘प्रतिनिधित्व’ के फार्मूले पर लंबी पारी खेलने की तैयारी में है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह की मौजूदगी में सुवेंदु अधिकारी ने कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड का दौरा किया में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
BJP ने क्यों चुना ‘सोशल इंजीनियरिंग’ का रास्ता?
BJP ने शुभेंदु अधिकारी के साथ जिस टीम को मंत्री बनाया है, उसमें जातीय, सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की साफ कोशिश दिख रही है। पार्टी ने ब्राह्मण, माहिश्य, मतुआ, राजवंशी, आदिवासी, ओबीसी और महिला वोट बैंक को प्रतिनिधित्व देकर बंगाल के हर बड़े सामाजिक वर्ग को संदेश देने की रणनीति अपनाई है।
सवर्ण और माहिश्य चेहरे का संतुलन
शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री बनाकर BJP ने बंगाल के ‘भद्रलोक’ और माहिश्य समुदाय दोनों को साधने की कोशिश की है। मेदिनीपुर क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ और ममता बनर्जी को हराने के बाद उनकी स्वीकार्यता पूरे बंगाल में बढ़ी है।
मतुआ समाज को बड़ा संदेश
मतुआ समाज से आने वाले अशोक कीर्तनिया को मंत्री बनाकर BJP ने उत्तर और दक्षिण 24 परगना तथा नदिया जिले के मतुआ वोट बैंक को मजबूत संदेश दिया है। पार्टी CAA के वादे के साथ अब सत्ता में भागीदारी का संकेत भी दे रही है।
राजवंशी वोट बैंक पर फोकस
उत्तर बंगाल में प्रभाव रखने वाले निसिथ प्रमाणिक को मंत्री बनाकर BJP ने कूचबिहार, जलपाईगुड़ी और दिनाजपुर बेल्ट में अपनी पकड़ मजबूत करने का दांव चला है।
जंगलमहल और आदिवासी समीकरण
जंगलमहल क्षेत्र से आने वाले खुदीराम टुडू को मंत्री बनाकर BJP ने आदिवासी और संथाल समुदाय को साधने की कोशिश की है। माना जा रहा है कि जंगलमहल की जीत में आदिवासी वोटरों की बड़ी भूमिका रही।
महिला वोट बैंक पर BJP का बड़ा दांव
अग्निमित्रा पॉल को कैबिनेट में शामिल कर BJP ने महिला और शहरी मध्यम वर्ग के वोटरों को साधने की कोशिश की है। अग्निमित्रा पॉल को आधुनिक और सशक्त बंगाली महिला चेहरे के तौर पर पेश किया जा रहा है।
दिलीप घोष के जरिए OBC कार्ड
दिलीप घोष को मंत्री बनाकर BJP ने ओबीसी और ग्रामीण वोट बैंक को साधने का प्रयास किया है। सद्गोप समुदाय से आने वाले दिलीप घोष को बंगाल में BJP के विस्तार का बड़ा चेहरा माना जाता है।
2029 की तैयारी में BJP
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शुभेंदु अधिकारी की (BJP ka Masterstroke) यह कैबिनेट केवल सरकार चलाने के लिए नहीं, बल्कि 2029 लोकसभा चुनाव और बंगाल में BJP को स्थायी राजनीतिक ताकत बनाने के लिए तैयार की गई है। BJP अब बंगाल में ‘कास्ट प्लस हिंदुत्व’ मॉडल के जरिए सियासी जमीन मजबूत करने की रणनीति पर आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।

