हांगकांग, 07 अगस्त। Child Abuse : इंसानियत को झकझोर देने वाले एक मामले में हांगकांग की अदालत ने अपने ही पांच साल के बेटे को लंबे समय तक भूखा रखने और उसके साथ लगातार क्रूरता करने की दोषी मां को 22 साल की जेल की सजा सुनाई है। अदालत ने इसे बच्चों के साथ अत्याचार के सबसे गंभीर मामलों में से एक बताया और कहा कि आरोपी महिला के व्यवहार में ‘ममता जैसी कोई भावना दिखाई नहीं देती।’
मौत के समय आधा रह गया था वजन
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, पांच वर्षीय बच्चे का वजन मौत के समय सिर्फ 9.7 किलोग्राम था, जबकि उसकी उम्र के बच्चे का सामान्य वजन इससे लगभग दोगुना होना चाहिए था। जांच में उसके शरीर पर 129 चोटों के निशान मिले। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि बच्चे को लंबे समय तक पीटा गया, उसके साथ हिंसा की गई और कई दिनों तक खाना नहीं दिया गया।
पेट में खाने का एक दाना तक नहीं मिला
डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम के दौरान पाया कि बच्चे के पेट में खाने का कोई अवशेष नहीं था। इससे यह अनुमान लगाया गया कि मौत से पहले उसे कई दिनों तक भोजन नहीं मिला था। जांच में यह भी सामने आया कि महिला बच्चे को घर के एक कमरे में अलग रखती थी और सप्ताह में केवल कुछ बार ही बाहर आने देती थी।
स्कूल से भी छिपाई सच्चाई
अदालत में बताया गया कि आरोपी महिला ने स्कूल शिक्षकों से भी झूठ बोलकर बच्चे की लगातार अनुपस्थिति की असली वजह छिपाई थी।
जज ने कहा- इससे ज्यादा भयावह मामला सोचना मुश्किल
हाई कोर्ट की जज सुज़ाना डी’अल्मेडा रेमेडियोस ने फैसले में कहा कि अपने न्यायिक करियर में उन्होंने शायद ही इससे अधिक दर्दनाक और भयावह मामला देखा हो। उन्होंने कहा कि बच्चे की मौत जानबूझकर भूखा रखने का परिणाम थी और आरोपी के व्यवहार में मातृत्व का कोई भाव नजर नहीं आया।
दो मामलों में सुनाई गई सजा
महिला ने अदालत में गैर-इरादतन हत्या और बच्चे के साथ क्रूरता के आरोप स्वीकार कर लिए। अदालत ने गैर-इरादतन हत्या के मामले में 20 साल और बच्चे के साथ क्रूरता के मामले में 2 साल की अलग-अलग सजा सुनाई। दोनों सजाएं लगातार चलेंगी, इसलिए महिला को कुल 22 साल जेल में बिताने होंगे। यह मामला हांगकांग की अदालत में पेश साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और न्यायालय के फैसले पर आधारित है।

