Nepal Flood Death Toll: नेपाल में तबाही के 5 दिन बाद भी हाहाकार! 788 की मौत 2500 से ज्यादा लापता; कई रास्ते बंद, सुरंगों में अब भी जिंदगी की तलाश

Nepal Flood Death Toll: नेपाल में तबाही के 5 दिन बाद भी हाहाकार! 788 की मौत 2500 से ज्यादा लापता; कई रास्ते बंद, सुरंगों में अब भी जिंदगी की तलाश

काठमांडू, 31 अगस्त। Nepal Flood Death Toll: नेपाल में आई भीषण बाढ़ को 6 दिन बीत चुके हैं, लेकिन तबाही का मंजर अब भी बरकरार है। बाढ़ और भूस्खलन से मरने वालों की संख्या बढ़कर 788 पहुंच गई है, जबकि 2,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हजारों परिवार अपने प्रियजनों की तलाश में भटक रहे हैं। इस बीच पानी का स्तर दोबारा बढ़ने से राहत और बचाव अभियान के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

9,435 लोगों का रेस्क्यू, राहत अभियान जारी

रविवार को भी नेपाल के कई प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया गया। अब तक 9,435 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। राहत एवं बचाव कार्य के लिए सैकड़ों हवाई उड़ानों का सहारा लिया गया। हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट वाले प्रभावित इलाकों से भी लोगों को सेना के हेलीकॉप्टरों के जरिए सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया है। जमीन पर नेपाली सेना, पुलिस और सशस्त्र बल के हजारों जवान लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे हुए हैं।

त्रिशूली नदी फिर उफान पर

मध्य नेपाल में त्रिशूली नदी का पानी एक बार फिर उफान पर आ गया। तेज बहाव के कारण करीब तीन घंटे के भीतर घ्यालचोक-चारौदी पुल बह गया। करीब 130 मीटर लंबा यह पुल गोरखा जिले के घ्यालचोक इलाके को पृथ्वी हाईवे से जोड़ता था। पुल टूटने के बाद आसपास के करीब 400 परिवारों का मुख्य संपर्क मार्ग बंद हो गया है। वहीं, भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है।

रसुवा में तबाही के निशान, मकान बने मलबे का ढेर

बाढ़ के साथ आई भारी गाद और मलबे ने कई इलाकों की तस्वीर बदल दी है। रसुवा जिले में कई मकान मलबे के ढेर में तब्दील हो गए हैं। चीन सीमा को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग भी बाढ़ में क्षतिग्रस्त हो गया था, जिससे राहत कार्य और व्यापार दोनों प्रभावित हुए। हालांकि, सड़क को बहाल करने में जुटी टीमों ने करीब 150 मीटर हिस्से को ट्रैफिक के लिए खोल दिया है, जबकि बाकी हिस्से को दुरुस्त करने का काम लगातार जारी है।

सुरंगों में जिंदगी की तलाश

सबसे चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में चल रहा है। रसुवा के अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए नेपाली सेना के साथ भारतीय, चीनी और दक्षिण कोरियाई विशेषज्ञ भी सहयोग कर रहे हैं। भारतीय विशेषज्ञों की मदद से रसुवा इलाके में दो दिनों के भीतर करीब 250 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। रेस्क्यू टीम सुरंग के करीब तीन किलोमीटर अंदर तक जाकर फंसे लोगों की तलाश कर रही है। चिलिमे और लांगटांग क्षेत्रों में भी नेपाली सेना के साथ संयुक्त अभियान चलाया जा रहा है।

अपर त्रिशूली-3 ए की सुरंग में रेस्क्यू ऑपरेशन

नुवाकोट स्थित अपर त्रिशूली-3 ए प्रोजेक्ट की सुरंग में भी बचाव अभियान जारी है। रास्ता साफ करने के लिए सेना के इंजीनियरों को नियंत्रित विस्फोट का सहारा लेना पड़ रहा है। मौके पर सेना, सशस्त्र पुलिस के स्निफर डॉग्स और नेपाल पुलिस के विशेषज्ञों सहित करीब 90 लोगों की टीम तैनात है। शुरुआत में सुरंग के भीतर जाने के लिए छोटा रास्ता बनाया गया था, लेकिन अंदर से कोई आवाज या हलचल नहीं मिलने के बाद भारी मशीनों की मदद से रास्ते को और चौड़ा किया जा रहा है।

कई शवों की नहीं हो सकी पहचान, सामूहिक अंतिम संस्कार

बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में शव मिलने से प्रशासन के सामने एक और गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। कई शवों की पहचान नहीं हो पा रही है। ऐसे मामलों में पहचान से जुड़े जरूरी सबूत सुरक्षित रखने और आवश्यक जांच प्रक्रिया पूरी करने के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। लापता लोगों की तलाश कर रहे परिवारों के लिए शवों की पहचान करना राहत अभियान का बेहद संवेदनशील और अहम हिस्सा बन गया है।

मोबाइल नेटवर्क बहाल करने की कोशिश तेज

भीषण बाढ़ से नेपाल टेलिकॉम और एनसेल के कई मोबाइल टावर प्रभावित हुए थे। राहत एजेंसियां संचार व्यवस्था को बहाल करने में जुटी हैं। प्रभावित क्षेत्रों में कई टावर दोबारा चालू किए जा चुके हैं। इसके साथ ही, उन दुर्गम इलाकों में संपर्क बनाए रखने के लिए सैटेलाइट फोन भी भेजे गए हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क अब भी पूरी तरह बहाल नहीं हो पाया है।

नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती; लापता लोगों तक पहुंचना

फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती 2,500 से ज्यादा लापता लोगों तक पहुंचना है। कहीं भारी मलबे ने रास्ते बंद कर दिए हैं, कहीं सुरंगों में प्रवेश मुश्किल बना हुआ है, तो कहीं नदियों का बढ़ता जलस्तर बचाव अभियान में बाधा बन रहा है। पांच दिन बाद भी नेपाल पूरी तरह सामान्य नहीं हो सका है। राहत दल एक साथ कई मोर्चों पर काम कर रहे हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके और बाढ़ प्रभावित परिवारों तक समय पर मदद पहुंचाई जा सके।

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