रायपुर, 01 सितंबर। Ambedkar Hospital Raipur: पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में जटिल हृदय रोग से जूझ रही 48 वर्षीय महिला की सफल कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी (CABG) की गई। बिहार के मधुबनी जिले की रहने वाली मरीज के हृदय की तीनों प्रमुख कोरोनरी धमनियों में गंभीर ब्लॉकेज था, जिसे ट्रिपल वेसल डिजीज (Triple Vessel Disease) कहा जाता है।
मरीज के हृदय की पंपिंग क्षमता करीब 40 प्रतिशत थी। इसके बावजूद विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. कृष्णकांत साहू और उनकी टीम ने सफलतापूर्वक बीटिंग हार्ट कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी (Beating Heart CABG) की।
500 से ज्यादा था ब्लड शुगर, पहले किया नियंत्रित
मरीज के इलाज में सबसे बड़ी चुनौती उनका बेहद अनियंत्रित ब्लड शुगर था। अस्पताल में भर्ती किए जाने के समय उनका ब्लड शुगर 500 mg/dL से अधिक था। ऐसी स्थिति में तत्काल बाईपास सर्जरी करना जोखिमपूर्ण हो सकता था। चिकित्सकीय टीम ने पहले ब्लड शुगर को नियंत्रित किया और मरीज को सर्जरी के लिए उपयुक्त स्थिति में लाने के बाद ही ऑपरेशन किया।
सीने की हड्डी खोलकर की गई सर्जरी
मरीज की सर्जरी मिडलाइन स्टर्नोटोमी (Midline Sternotomy) तकनीक से की गई। इसमें सीने की मध्य हड्डी यानी स्टर्नम को सावधानीपूर्वक खोलकर हृदय तक पहुंच बनाई जाती है। बाईपास के लिए मैमरी आर्टरी (Mammary Artery) का इस्तेमाल किया गया। आर्टेरियल ग्राफ्ट को सामान्यतः लंबे समय तक प्रभावी रहने वाला ग्राफ्ट माना जाता है।
ऑपरेशन के दूसरे दिन चलने लगी मरीज
सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी भी अच्छी रही। ऑपरेशन के दिन ही होश में आने के बाद उन्होंने शाम को हल्का नाश्ता किया। इसके बाद ऑपरेशन के दूसरे दिन से ही चलना-फिरना शुरू कर दिया। अब मरीज की हालत बेहतर है और उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज किया जा रहा है।
मधुबनी से दरभंगा और फिर पहुंचीं रायपुर
मरीज के मुताबिक, करीब डेढ़ महीने पहले पहली बार उन्हें सीने में दर्द हुआ था। उन्होंने मधुबनी में चिकित्सकीय सलाह ली, लेकिन हृदय विशेषज्ञ की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें गैस और एसिडिटी की दवाएं दी गईं। कुछ दिनों बाद दोबारा सीने में दर्द होने पर परिजन उन्हें दरभंगा के एक बड़े अस्पताल ले गए। वहां एंजियोग्राफी में हृदय की तीनों प्रमुख कोरोनरी धमनियों में ब्लॉकेज का पता चला और डॉक्टरों ने बाईपास सर्जरी की सलाह दी।
परिजन पहले पटना में सर्जरी कराने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान रायपुर में रहने वाले रिश्तेदार से उन्हें अम्बेडकर अस्पताल की हार्ट सर्जरी सुविधा की जानकारी मिली। इसके बाद वे एंजियोग्राफी की रिपोर्ट लेकर रायपुर पहुंचे।
बिहार के आयुष्मान कार्ड से छत्तीसगढ़ में हुआ इलाज
मरीज के बिहार निवासी होने के कारण यह भी जानकारी ली गई कि क्या बिहार के आयुष्मान कार्ड के आधार पर छत्तीसगढ़ में उनकी सर्जरी हो सकती है। आयुष्मान योजना कार्यालय से पुष्टि होने के बाद मरीज को अम्बेडकर अस्पताल में भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। यह मामला इस बात का उदाहरण भी है कि दूसरे राज्यों के मरीज अब जटिल हृदय उपचार के लिए रायपुर के शासकीय चिकित्सा संस्थानों का रुख कर रहे हैं।
महिलाओं में भी बढ़ रहा हृदय रोग का खतरा
डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि महिलाओं में कोरोनरी आर्टरी डिजीज का जोखिम सामान्यतः पुरुषों की तुलना में कम माना जाता है और यह बीमारी अक्सर अधिक उम्र में सामने आती है। लेकिन अनियंत्रित मधुमेह, मोटापा, तंबाकू सेवन, पारिवारिक इतिहास, निष्क्रिय जीवनशैली और अस्वास्थ्यकर खान-पान जैसी स्थितियां महिलाओं में कम उम्र में भी हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकती हैं। उन्होंने महिलाओं से सीने में दर्द, सांस फूलना, अत्यधिक थकान या अन्य हृदय संबंधी लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने और समय पर चिकित्सकीय जांच कराने की अपील की।
पड़ोसी राज्यों के मरीजों का भी बढ़ रहा भरोसा
अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में ओपन हार्ट सर्जरी, कोरोनरी बाईपास सर्जरी, चेस्ट सर्जरी और विभिन्न वैस्कुलर सर्जरी की सुविधाएं उपलब्ध हैं। पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी और अम्बेडकर अस्पताल अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने इसे शासकीय चिकित्सा संस्थान के लिए गौरव की बात बताया। उनके अनुसार, छत्तीसगढ़ के साथ बिहार और आसपास के राज्यों से भी मरीज जटिल हृदय एवं ओपन हार्ट सर्जरी के लिए अम्बेडकर अस्पताल पहुंच रहे हैं।

