नई दिल्ली/रायपुर, 09 सितंबर। Hindi Advisory Committee: भारत सरकार ने अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति का पुनर्गठन किया है। मंत्रालय ने 20 जुलाई 2023 के पूर्व संकल्प को अधिक्रमित करते हुए राजभाषा विभाग के संबंधित निर्देशों के अनुपालन में नई समिति का गठन किया है।
जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार सांसद बृजमोहन अग्रवाल को हिंदी सलाहकार समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री समिति के अध्यक्ष और अल्पसंख्यक कार्य राज्य मंत्री उपाध्यक्ष के रूप में शामिल हैं।
बृजमोहन अग्रवाल समेत कई सांसद समिति में शामिल
समिति में संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा नामित सदस्यों के साथ-साथ गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा नामित गैर-सरकारी सदस्यों को भी शामिल किया गया है।
समिति में शामिल प्रमुख सदस्य
- बृजमोहन अग्रवाल. सांसद, लोकसभा, अध्यक्ष
- इवेला राजेंद्र- सांसद, राज्यसभा, सदस्य
- गुलाम अली- सदस्य, राज्यसभा, सदस्य
- सतनाम सिंह संधू- सदस्य, राज्यसभा, सदस्य
- कल्याण बनर्जी- सांसद, लोकसभा, सदस्य
- कृति देवी देवबिमन- सांसद, लोकसभा, सदस्य
- हुसैना कॉलनी- गैर-सरकारी सदस्य
- मनोज कुमार- गैर-सरकारी सदस्य
- कृष्ण कुमार नथानी- गैर-सरकारी सदस्य
- सुरजीत सिंह ‘सुभरी’- सदस्य
- दीप्ति ‘दीप’- सदस्य
- वी.के. बालाजी- सदस्य
- प्रो. सुधीर कुमार आर्य- सदस्य
- डॉ. विजय पाटिल- विश्व हिंदी परिषद के प्रतिनिधि सदस्य
- प्रो. माधव सोनवक्के- हिंदी प्रचार सभा, हैदराबाद के प्रतिनिधि सदस्य
इसके अलावा अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, राजभाषा विभाग, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग, केंद्रीय वक्फ परिषद, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम समेत संबंधित संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी पदेन सदस्य के रूप में समिति में शामिल किए गए हैं।
क्या होगा हिंदी सलाहकार समिति का काम?
समिति का मुख्य कार्य संविधान, राजभाषा अधिनियम एवं नियमों में राजभाषा से संबंधित प्रावधानों के कार्यान्वयन तथा केंद्रीय हिंदी समिति के निर्णयों और राजभाषा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुपालन पर सलाह देना होगा। इसके साथ ही अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के कामकाज में हिंदी के प्रगतिशील प्रयोग को बढ़ाने के संबंध में भी समिति सलाह देगी।
तीन साल का होगा कार्यकाल
राजपत्र में जारी आदेश के अनुसार समिति का कार्यकाल सामान्यतः गठन की तारीख से तीन वर्ष का होगा। हालांकि, सांसद सदस्यों के लिए उनकी संसद सदस्यता और पदेन सदस्यों के लिए संबंधित पद पर बने रहने से जुड़ी शर्तें लागू रहेंगी। समिति का मुख्यालय नई दिल्ली में होगा। आवश्यकता पड़ने पर समिति की बैठक किसी अन्य स्थान पर भी आयोजित की जा सकती है।

