Sanwaliya Seth Mandir Donation : चौंकाने वाला आंकड़ा…सिर्फ 1 महीने में ₹41 करोड़…! श्री सांवलिया सेठ मंदिर में टूटा अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड…यहां देखें ‘व्यापार के भगवान’

Sanwaliya Seth Mandir Donation : चौंकाने वाला आंकड़ा…सिर्फ 1 महीने में ₹41 करोड़…! श्री सांवलिया सेठ मंदिर में टूटा अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड…यहां देखें ‘व्यापार के भगवान’

चित्तौड़गढ़, 02 मई। Sanwaliya Seth Mandir Donation : मेवाड़ के आस्था केंद्र और श्रीकृष्ण धाम के रूप में प्रसिद्ध श्री सांवलिया सेठ मंदिर ने एक बार फिर श्रद्धा का नया इतिहास रच दिया है। इस बार मंदिर में मात्र एक महीने के भीतर 41 करोड़ 67 लाख 38 हजार 569 रुपए का अभूतपूर्व चढ़ावा प्राप्त हुआ है, जिसने पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं।

इस चढ़ावे में केवल नकद राशि ही नहीं, बल्कि भक्तों की गहरी आस्था भी झलकती है। श्रद्धालुओं ने करीब 1 करोड़ रुपए मूल्य का 660 ग्राम 500 मिलीग्राम सोना और लगभग 2 करोड़ रुपए मूल्य की 84 किलो 620 ग्राम चांदी भी अर्पित की है।

कहां से आया इतना चढ़ावा?

मंदिर समिति के अनुसार, 33 करोड़ 21 लाख 63 हजार 539 रुपए दान पात्रों से प्राप्त हुए हैं, जबकि 8 करोड़ 45 लाख 75 हजार 30 रुपए भेंट कक्ष और ऑनलाइन माध्यमों से आए हैं। इसके अलावा विदेशी मुद्रा और चेक के रूप में भी बड़ी मात्रा में भेंट प्राप्त हुई है, जो मंदिर की अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता को दर्शाता है।

पुराने रिकॉर्ड भी टूटे

पिछले वर्ष अप्रैल महीने में अधिकतम 25 करोड़ रुपए का चढ़ावा आया था। वहीं दो महीनों में 51 करोड़ से अधिक राशि मिली थी। लेकिन इस बार सिर्फ एक महीने में ही 41 करोड़ से ज्यादा का आंकड़ा पार करना अपने आप में ऐतिहासिक उपलब्धि बन गया है।

7 चरणों में पूरी हुई गणना

दान राशि की गणना 16 अप्रैल से शुरू होकर सात चरणों में पूरी की गई। अमावस्या और रविवार को छोड़कर लगातार चली इस प्रक्रिया में कैमरों की निगरानी में मंदिर समिति और बैंक कर्मियों ने पारदर्शिता के साथ काम किया।

क्यों खास है सांवलिया सेठ?

मेवाड़ में भगवान श्रीकृष्ण के इस स्वरूप को ‘व्यापार के संरक्षक’ के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि जो भी भक्त अपने व्यापार में सांवलिया सेठ को साझेदार बनाता है, उसे कभी नुकसान नहीं होता।

अनोखी आस्था की मिसाल

यह मंदिर अपनी (Sanwaliya Seth Mandir Donation) अनोखी परंपराओं के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां, भक्त न केवल नकद दान देते हैं, बल्कि प्रतीकात्मक भेंट भी चढ़ाते हैं। किसान अच्छी फसल के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए गेहूँ की बालियां चढ़ाते हैं; वहीं, अन्य लोग लहसुन और प्याज की चांदी की प्रतिकृतियां भेंट करते हैं। अफीम की खेती करने वाले लोग अफीम के डोडे की चांदी की प्रतिकृतियां चढ़ाते हैं, जबकि जो लोग झूठे कानूनी मामलों से राहत पाते हैं, वे चांदी की हथकड़ियां और बंदूकें भेंट करते हैं। यही अनोखी आस्था और परंपरा ‘श्री सावलियां सेठ मंदिर’ को न केवल देश के भीतर, बल्कि पूरे विश्व में विशिष्ट बनाती है।

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