नई दिल्ली, 12 दिसंबर। Leaving the Country : लंबे समय से सुर्खियों में रहने वाले भारतीय नागरिकता छोड़ने के मुद्दे पर अब एक चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। विदेश मंत्रालय द्वारा राज्यसभा में पेश किए गए ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में नागरिकता छोड़ने वाले भारतीयों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की गई है और यह गिरावट नीति-निर्माताओं और विशेषज्ञों के लिए आश्चर्य का विषय बन गई है।
2024 में मात्र 2.06 लाख भारतीयों ने छोड़ी नागरिकता
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार-
- 2020: 85,256
- 2021: 1,63,370
- 2022: 2,25,620
- 2023: 2,16,219
- 2024: 2,06,378
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि 2023 के मुकाबले 2024 में नागरिकता छोड़ने वालों की संख्या में लगभग 5% गिरावट आई है, जो पिछले तीन सालों में सबसे कम है। यह गिरावट उस समय दर्ज हुई है जब विश्वभर में माइग्रेशन ट्रेंड बढ़ रहा है।
2019 रहा सबसे ‘शॉकिंग’ साल
साल 2011 से 2019 के बीच, भारत छोड़ने वालों की संख्या सबसे अधिक रही। 2011 में 1,22,819 जबकि 2014 में 1,29,328 थी। यह रुझान बताता है कि 2019 से पहले विदेश जाने की लहर ज़बरदस्त थी।
विपक्ष ने उठाए सवाल, सरकार ने दिया डेटा से जवाब
पिछले वर्ष विपक्ष ने संसद में जोरदार आरोप लगाया था कि सरकार की नीतियों से निराश लोग देश छोड़ रहे हैं। लेकिन मंत्रालय के ताज़ा आंकड़े इस दावे के विपरीत एक नया और चौंकाने वाला परिदृश्य पेश करते हैं।
आख़िर अचानक गिरावट क्यों?
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, विदेशी वीज़ा नियमों (Leaving the Country) का कड़ा होना, भारत में बढ़ते अवसर, इन तीनों ने मिलकर नागरिकता छोड़ने की दर में गिरावट लाने में भूमिका निभाई है। निश्चित तौर पर यह रिपोर्ट आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस को फिर से गर्म कर सकती है, क्योंकि भारत छोड़ने वाले लोगों की संख्या में आई यह गिरावट कई सवाल भी खड़े करती है और कई नई व्याख्याओं के द्वार भी खोलती है।

