
रायपुर, 12 दिसंबर। New Guideline : छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट एसोसिएशन ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की नई गाइडलाइन दरों में की गई असामान्य वृद्धि का विरोध किया है और शासन से पुरानी गाइडलाइन को 31 मार्च 2026 तक यथावत् रखने की मांग की है। इस संबंध में संघ के प्रतिनिधियों और व्यापारियों ने एक ज्ञापन जारी कर सरकार से पुनरीक्षण पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।
1400 वर्गमीटर तक के भूखंडों के मूल्यांकन में बड़ा निर्णय, संघ ने किया स्वागत
केन्द्रीय मूल्यांकन बोर्ड द्वारा लिए गए हालिया निर्णय, 1400 वर्गमीटर तक के भूखंडों पर इन्क्रीमेंट आधारित गणना को समाप्त करना, और पूर्व की तरह स्लैब दर से मूल्यांकन पुनः लागू करना, रियल एस्टेट एसोसिएशन ने इसका स्वागत किया है। व्यापारियों ने कहा कि यह निर्णय शहरी भूखंडों के मूल्यांकन में पारदर्शिता और स्थिरता लाएगा।
ग्रामों में गाइडलाइन दरों में भारी वृद्धि पर आपत्ति
व्यापारियों का कहना है कि वर्तमान गाइडलाइन में ग्रामीण व शहरी ग्रामों की दरों में असामान्य वृद्धि की गई है, जो बाजार की वास्तविक स्थिति के अनुरूप नहीं है। संघ ने मांग की है कि, पुरानी गाइडलाइन को 31 मार्च 2026 तक जारी रखा जाए, अन्यथा एक ही वित्तीय वर्ष में एक ही जमीन की दो अलग-अलग कीमतें तय होना अव्यवहारिक होगा।
ग्रामीण क्षेत्रों के उपबंधों में सुधार की मांग
संघ ने यह भी उल्लेख किया कि वर्तमान उपबंधों में, राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्ग, जिला मार्ग, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क, मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं पीडब्ल्यूडी सड़कों को मुख्य मार्ग माना गया है। संघ का कहना है कि इस प्रावधान के कारण कई ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि मूल्य अनावश्यक रूप से बढ़ रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि पूर्व नियम के अनुसार, मुख्य मार्ग से अंदर स्थित सिंचित भूमि के मूल्य में केवल 10% अतिरिक्त राशि जोड़कर मूल्यांकन किया जाए।
पंजीयन शुल्क 4% से घटाकर 0.8% करने की मांग
व्यापारियों ने पंजीयन शुल्क में भी राहत की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान 4% पंजीयन शुल्क भारी पड़ रहा है, इसलिए इसे घटाकर 0.8% किया जाए, जिससे व्यापार और आम लोगों को राहत मिले।
व्यापारी हितों को ध्यान में रखने पर सरकार का आभार
रियल एस्टेट एसोसिएशन ने माननीय अधिकारियों द्वारा लिए गए हालिया व्यापारी-हितैषी निर्णयों के लिए आभार व्यक्त किया है और उम्मीद जताई है कि, गाइडलाइन पुनरीक्षण तक पुरानी दरें लागू रखने की मांग को भी गंभीरता से स्वीकार किया जाएगा। यह मुद्दा अब रियल एस्टेट सेक्टर, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और भूमि खरीद-फरोख्त से जुड़े हजारों लोगों को सीधे प्रभावित करता है। सरकार के आगामी निर्णय (New Guideline) पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

