FY2025 Report : बड़ी खबर…RBI के आंकड़े…! कौन से राज्य दबे हैं ब्याज के बोझ तले…? टॉप-10 कर्ज में डूबे राज्य…सबसे ज्यादा कर्ज में पश्चिम बंगाल…छत्तीसगढ़ की स्थिति…? यहां देखें List

FY2025 Report : बड़ी खबर…RBI के आंकड़े…! कौन से राज्य दबे हैं ब्याज के बोझ तले…? टॉप-10 कर्ज में डूबे राज्य…सबसे ज्यादा कर्ज में पश्चिम बंगाल…छत्तीसगढ़ की स्थिति…? यहां देखें List

नई दिल्ली, 31 जनवरी। FY2025 Report : भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और दुनिया के सबसे तेजी से आगे बढ़ते देशों में शामिल है। वर्ल्ड बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी इसकी तारीफ की है। लेकिन तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में कई बड़े राज्य भारी कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के FY2025 के आंकड़ों के मुताबिक कई राज्यों को अपने टैक्स और नॉन-टैक्स रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा सिर्फ ब्याज के भुगतान में खर्च करना पड़ रहा है।

टॉप-10 कर्ज में डूबे राज्य

  1. पश्चिम बंगाल: राजस्व का 42% ब्याज में खर्च, 1.09 लाख करोड़ रुपये में से 45 हजार करोड़ रुपये ब्याज पर।
  2. पंजाब: राजस्व का 34% ब्याज में, 70,000 करोड़ में से 24,000 करोड़।
  3. बिहार: राजस्व का 33% ब्याज में, 62,000 करोड़ में से 21,000 करोड़।
  4. केरल: 28% ब्याज भुगतान, 1.03 लाख करोड़ में से 29,000 करोड़।
  5. तमिलनाडु: 28% ब्याज भुगतान, 62,000 करोड़ में से 17,000 करोड़।
  6. हरियाणा: 27% ब्याज भुगतान, 94,000 करोड़ में से 25,000 करोड़।
  7. राजस्थान: 38% ब्याज भुगतान, 1.48 लाख करोड़ में से 38,000 करोड़।
  8. आंध्र प्रदेश: 29% ब्याज भुगतान, 1.2 लाख करोड़ में से 29,000 करोड़।
  9. मध्य प्रदेश: 22% ब्याज भुगतान, 1.23 लाख करोड़ में से 27,000 करोड़।
  10. कर्नाटक: 19% ब्याज भुगतान, 2.03 लाख करोड़ में से 39,000 करोड़।

छत्तीसगढ़ की स्थिति

RBI के FY2025 के आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ का कुल टैक्स और नॉन-टैक्स रेवेन्यू लगभग 90,000–95,000 करोड़ रुपये के आसपास है। इसमें से ब्याज भुगतान करीब 16–18% या 15,000–17,000 करोड़ रुपये के बीच आता है। यह आंकड़ा बताता है कि छत्तीसगढ़ अन्य राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल, पंजाब और बिहार की तुलना में कर्ज के बोझ में कम दबा हुआ है, लेकिन निवेश और विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय सीमाओं का सामना करना पड़ता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे राज्यों को वित्तीय सुधार, कर्ज प्रबंधन और राजस्व बढ़ाने के उपाय करने होंगे ताकि ब्याज के बोझ से विकास प्रभावित न हो।

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