Congress Councillor Controversy : कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख ने नगर निगम की बजट बैठक में ‘वंदे मातरम’ गाने से किया इनकार…! अदालत ने खारिज की अग्रिम जमानत…वीडियो फुटेज और डिजिटल सबूतों को माना बड़ा आधार

Congress Councillor Controversy : कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख ने नगर निगम की बजट बैठक में ‘वंदे मातरम’ गाने से किया इनकार…! अदालत ने खारिज की अग्रिम जमानत…वीडियो फुटेज और डिजिटल सबूतों को माना बड़ा आधार

इंदौर, 05 जून। Congress Councillor Controversy फ़ौज़िया शेख़ को ‘वंदे मातरम’ विवाद मामले में बड़ा कानूनी झटका लगा है। इंदौर की स्थानीय अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। इसके बाद गिरफ्तारी से राहत मिलने की उम्मीदों को बड़ा झटका माना जा रहा है।

मामला 8 अप्रैल का बताया जा रहा है, जब इंदौर नगर निगम की बजट बैठक के दौरान पार्षद फौजिया शेख पर ‘वंदे मातरम’ गाने से इनकार करने का आरोप लगा था। इस घटना के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर विवाद शुरू हो गया था। पुलिस ने मामले में केस दर्ज किया था। आरोप है कि इस कृत्य से विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य फैलाने की स्थिति पैदा हो सकती है।

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रूपेश नायक ने कहा कि वीडियो फुटेज, शिकायतकर्ता के बयान और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया आरोपों के लिए पर्याप्त आधार बनता है। इसी आधार पर अदालत ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।

कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं?

फौजिया शेख की ओर से कोर्ट में कहा गया कि उन्होंने कभी ‘वंदे मातरम’ गाने से इनकार नहीं किया। उनका दावा था कि उन्हें राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते झूठा फंसाया गया है। साथ ही यह भी कहा गया कि वह जांच में सहयोग कर रही हैं और उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। वहीं दूसरे पक्ष ने दलील दी कि अगर आरोपी को अग्रिम जमानत दी गई तो वह जांच को प्रभावित कर सकती हैं, गवाहों को धमका सकती हैं या फरार हो सकती हैं।

कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने शिकायतकर्ता और गवाहों के बयान, वीडियो फुटेज और डिजिटल सबूतों की समीक्षा के बाद माना कि प्रथम दृष्टया आरोपी के खिलाफ पर्याप्त आधार मौजूद हैं। अदालत ने कहा कि मामला गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आता है और इसमें तीन साल तक की सजा हो सकती है।

हालांकि अदालत ने पुलिस को सुप्रीम कोर्ट के अर्निश कुमार बनाम बिहार राज्य मामले में जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने का निर्देश भी दिया। इन निर्देशों के अनुसार सात साल तक की सजा वाले मामलों में गिरफ्तारी से पहले ठोस कारण दर्ज करना जरूरी होता है।

गौरतलब है कि इसी मामले में एक अन्य पार्षद रुबीना इक़बाल खान का नाम भी सामने आया था। पुलिस ने 15 अप्रैल को दोनों महिलाओं के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

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