रायपुर, 02 जुलाई। Raipur Land Encroachment Case : छत्तीसगढ़ में सरकारी ज़मीन पर अवैध कब्ज़े और सरकारी योजनाओं को ठेंगा दिखाने का एक बड़ा मामला सामने आया है। रायपुर के ग्राम नकटी में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल की एक सामान्य आवासीय योजना को पटरी से उतारने के लिए ‘मुआवजे के खेल’ का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। साल 2021 में जहाँ सिर्फ 3 हेक्टेयर पर कच्चे मकान थे, वहीं साल 2023 के बाद देखते ही देखते 15 हेक्टेयर बेशकीमती चारागाह भूमि पर आलीशान पक्के मकान खड़े हो गए।
शुरुआती जांच में सामने आया है कि ग्रामीणों को जब सरकारी योजना और भू-आवंटन की भनक लगी, तो पूर्व सरपंच की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण का यह खेल रचा गया।
साल दर साल कैसे बुना गया कब्ज़े का चक्रव्यूह (पूरा घटनाक्रम)
01 सितंबर 2020: तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल ने ग्राम नकटी के खसरा क्रमांक 420 (रकबा 15.479 हेक्टेयर) पर आवासीय योजना के लिए कलेक्टर कार्यालय से ज़मीन मांगी।
भू-अभिलेख प्रक्रिया: मांग के आधार पर भू-आवंटन अधिकारी ने 15.47 हेक्टेयर भूमि को प्रस्तावित कर प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
09 नवंबर 2020: नायब तहसीलदार ने जनता से आपत्तियां बुलाने के लिए सार्वजनिक इश्तिहार जारी किया।
04 जनवरी 2021: स्वास्थ्य और शिक्षा समेत किसी भी विभाग ने इस योजना पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं की।
26 जून 2021 (पटवारी रिपोर्ट): ग्राम नकटी (जनसंख्या 2110) में 22.736 हेक्टेयर शासकीय भूमि दर्ज की गई, जिसमें से शेष हिस्से को शामिलन चारागाह घोषित किया गया। राजस्व रिकॉर्ड में साफ लिखा गया कि यह ज़मीन हाउसिंग बोर्ड को दी जानी है।
08 दिसंबर 2021: हाउसिंग बोर्ड ने एसडीएम को रिपोर्ट भेजी कि प्रस्तावित ज़मीन के केवल 3 हेक्टेयर क्षेत्र में कुछ कच्चे मकान और बाड़ी के रूप में मामूली अतिक्रमण है।
25 फरवरी 2022: गृह निर्माण मंडल ने आवंटन प्रक्रिया को पुनर्विचार के साथ आगे बढ़ाया।
2023 के बाद पलटी बाज़ी: मुआवजे के लालच में ‘लैंड ग्रैबिंग’
असली खेल साल 2023 के बाद शुरू हुआ। कार्यपालन अभियंता, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल, रायपुर के पत्र क्रमांक 3203 के मुताबिक, जैसे ही ग्रामीणों को आवंटन की खबर मिली, पूर्व सरपंच के साथ मिलकर शामिलन चारागाह की ज़मीन को हड़पने की होड़ मच गई।
चौंकाने वाला बदलाव साल 2021 का 3 हेक्टेयर का मामूली अतिक्रमण, साल 2023 आते-आते 15 हेक्टेयर के कंक्रीट के जाल में बदल गया। यह सब सिर्फ इसलिए किया गया ताकि भविष्य में सरकार से मोटा मुआवजा ऐंठा जा सके।
आलीशान बंगले और रसूखदार कब्ज़ाधारी: आंकड़ों का विश्लेषण
सरकारी ज़मीन पर हुए इस अवैध निर्माण का आकार और कब्ज़ाधारियों की प्रोफाइल देखकर अधिकारी भी हैरान हैं-
निर्मित मकानों का आकारवार विवरण
- 1000 वर्गफीट: 7 मकान
- 1200 वर्गफीट: 3 मकान
- 5000 से 10000 वर्गफीट (आलीशान): 13 मकान
- 10000 वर्गफीट से अधिक (महा-कब्ज़ा): 21 मकान
कब्ज़ाधारियों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति
- पक्के रसूखदार: 44 ऐसे परिवार हैं, जिनका उसी गांव में पहले से ही अपना मकान है।
- रिश्तेदारों की एंट्री: 15 ऐसे बेटी-दामाद हैं, जिनका अन्य जगहों पर पहले से घर है, लेकिन यहाँ सिर्फ ज़मीन घेरने आए हैं।
- ज़रूरतमंद: केवल 16 परिवार ऐसे हैं, जिनके पास कहीं भी मकान नहीं है।
इस बड़े खुलासे के बाद अब राजस्व विभाग और प्रशासन के रुख पर सबकी नज़रें टिकी हैं। क्या इन रसूखदार अतिक्रमणकारियों पर बुलडोज़र चलेगा या मुआवजे का यह खेल कामयाब हो जाएगा?
नोट: यह जानकारी उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों और संबंधित अभिलेखों पर आधारित है। भूमि, अतिक्रमण और कार्रवाई से जुड़े तथ्यों पर अंतिम निष्कर्ष सक्षम प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

