SCSP Programme : आईसीएआर-एनआईबीएसएम ने एससीएसपी कार्यक्रम के तहत किसानों को वितरित किए पावर स्प्रेयर एवं सोलर पैनल

SCSP Programme : आईसीएआर-एनआईबीएसएम ने एससीएसपी कार्यक्रम के तहत किसानों को वितरित किए पावर स्प्रेयर एवं सोलर पैनल

रायपुर, 31 अगस्त। SCSP Programme : भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (आईसीएआर-निब्सम), रायपुर द्वारा अनुसूचित जाति उप-योजना (एससीएसपी) के अंतर्गत किसानों एवं महिला किसानों को 140 बैटरी चालित पावर स्प्रेयर तथा सोलर पैनल के तीन सेट वितरित किए गए। इस पहल का उद्देश्य कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा देना, किसानों की शारीरिक मेहनत एवं श्रम को कम करना तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना है। कार्यक्रम में मुर्रा, बेठिया, देवगांव, अडसेना एवं बेलटुकरी गांवों के कुल 160 किसान एवं महिला किसानों ने भाग लिया।

किसानों को संबोधित करते हुए डॉ. पी. के. राय, निदेशक, ने वर्तमान मानसून के दौरान वर्षाजल के संग्रहण एवं संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने किसानों से उपलब्ध जल-संरक्षण एवं जल-संचयन संरचनाओं में वर्षाजल को एकत्रित करने तथा संग्रहित जल का रबी फसलों के उत्पादन में विवेकपूर्ण उपयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने फसल विविधीकरण को किसानों की आय बढ़ाने, संसाधनों के कुशल उपयोग तथा कृषि उत्पादन के जोखिम को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

डॉ. राय ने कहा कि संस्थान द्वारा एससीएसपी कार्यक्रमों के माध्यम से विभिन्न गांवों के किसानों एवं महिला किसानों को निरंतर आवश्यकतानुसार तकनीकी ज्ञान, प्रशिक्षण तथा कृषि संबंधी आवश्यक सामग्री एवं उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल किसानों की क्षमता बढ़ाने, कृषि उत्पादकता में सुधार लाने में सहायक हैं।

आईसीएआर-एनआईबीएसएम ने एससीएसपी कार्यक्रम के तहत किसानों को वितरित किए  पावर स्प्रेयर एवं सोलर पैनल

डॉ. पंकज शर्मा, संयुक्त निदेशक एवं कार्यक्रम समन्वयक ने किसानों को धान की फसल की नियमित निगरानी करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में धान की फसल रोपाई के लगभग 40-50 दिन की अवस्था में है। इस समय धान में तना छेदक (येलो स्टेम बोरर) एवं पत्ती लपेटक (लीफ फोल्डर) कीटों का प्रकोप देखा जा रहा है, जबकि कुछ स्थानों पर जीवाणु झुलसा रोग (बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट) के लक्षण भी पाए गए हैं। उन्होंने किसानों से कीट एवं रोगों की प्रारंभिक अवस्था में पहचान कर समय पर आवश्यकतानुसार प्रबंधन उपाय अपनाने तथा अनावश्यक कीटनाशकों के प्रयोग से बचने का आग्रह किया। उन्होंने फेरोमोन ट्रैप एवं ट्राइकोकार्ड को एकीकृत कीट प्रबंधन ( IPM) के महत्वपूर्ण घटकों के रूप में अपनाने तथा रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग केवल आवश्यकता एवं कीट प्रकोप के स्तर के आधार पर करने की सलाह दी।

आईसीएआर-एनआईबीएसएम ने एससीएसपी कार्यक्रम के तहत किसानों को वितरित किए  पावर स्प्रेयर एवं सोलर पैनल

कार्यक्रम में शामिल किसानों एवं ग्राम प्रतिनिधियों ने एससीएसपी कार्यक्रम के अंतर्गत तकनीकी मार्गदर्शन, कृषि उपकरण एवं आवश्यक कृषि सामग्री उपलब्ध कराने के लिए संस्थान के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने पावर स्प्रेयर एवं सोलर पैनल के वितरण को कृषि कार्यों को सुगम बनाने तथा टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में उपयोगी एवं महत्वपूर्ण पहल बताया।

कार्यक्रम में सरपंच श्रीमती कंचन गायकवाड़ एवं श्री प्रदीप मडरिया सहित संस्थान के वैज्ञानिक एवं अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. के. सी. शर्मा, प्रधान वैज्ञानिक एवं नोडल अधिकारी द्वारा किया गया।

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