भिलाई, 29 सितंबर। BSP Scrap Scam: भिलाई स्टील प्लांट (BSP) में सामने आए कथित स्क्रैप चोरी मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) तक पहुंच गई है। राज्य सरकार की सिफारिश के बाद मामले को CBI जांच के लिए भेजे जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस केस में अब तक 21 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस ने करीब ₹3.22 करोड़ की संपत्ति और सामग्री जब्त की है, जिसमें लगभग ₹90 लाख का लौह स्क्रैप, वाहन और भारी मशीनरी शामिल है।
CBI जांच से बढ़ सकती है जांच का दायरा
मामले में पुरानी भिलाई थाने में शिकायत दर्ज होने के बाद दुर्ग पुलिस जांच कर रही थी। जांच के दौरान BSP के कर्मचारियों और स्क्रैप कारोबार से जुड़े लोगों की कथित भूमिका सामने आने के बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने प्लांट से स्क्रैप बाहर निकालने के लिए फ्लू डस्ट की आड़ इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आने के बाद कार्रवाई की थी।
अब CBI जांच शुरू होने पर मामले में कथित नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन, प्लांट के अंदर-बाहर की गतिविधियों और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की पड़ताल हो सकती है।
GM और इंजीनियर समेत 21 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस कार्रवाई में BSP के जनरल मैनेजर हिमांशु भूषण मलिक और एसोसिएट इंजीनियर मनोज कुमार देवांगन समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा ट्रांसपोर्टर और स्क्रैप कारोबार से जुड़े लोगों पर भी कार्रवाई हुई है। जुलाई में दोनों BSP अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद मामले में गिरफ्तारियों की संख्या 15 हुई थी, जबकि सितंबर तक यह संख्या 21 पहुंच गई।
पुलिस के मुताबिक, शुरुआती कार्रवाई में करीब 250 टन लौह सामग्री बरामद की गई थी। इसमें लोहे की प्लेट, बीम और कटिंग सामग्री शामिल थी। बरामद माल को फ्लू डस्ट के साथ छिपाकर ले जाने का आरोप जांच में सामने आया।
₹3.22 करोड़ की संपत्ति जब्त
मामले में पुलिस ने करीब ₹3.22 करोड़ की संपत्ति जब्त की है। इसमें लगभग ₹90 लाख का स्क्रैप, ट्रक, हाईवा, जेसीबी, हाइड्रा और अन्य मशीनरी शामिल है।
अब CBI खंगालेगी पूरा नेटवर्क
राज्य सरकार की सिफारिश के बाद केस डायरी CBI को सौंपे जाने के बाद जांच का दायरा और बढ़ सकता है। CBI कथित सिंडिकेट में शामिल लोगों, BSP से जुड़ी संभावित अंदरूनी भूमिका, स्क्रैप की निकासी और उसके बाद की सप्लाई चेन की जांच कर सकती है। हालांकि, ₹10 हजार करोड़ से अधिक के नुकसान और करीब 40 साल से यह कथित खेल चलने जैसे दावों को अंतिम तथ्य मानने से पहले आधिकारिक जांच या सक्षम एजेंसी के निष्कर्ष का इंतजार करना जरूरी है।


