रायपुर, 04 अक्टूबर। Salim Raj Statement: शारदीय नवरात्रि के साथ राजधानी रायपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में गरबा आयोजनों की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी बीच गरबा आयोजनों में मुस्लिम युवाओं की भागीदारी को लेकर छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि गरबा को केवल मनोरंजन या डांस का कार्यक्रम नहीं, बल्कि मां दुर्गा की आराधना से जुड़ा धार्मिक आयोजन माना जाना चाहिए।
मुस्लिम युवाओं से क्या बोले सलीम राज?
डॉ. सलीम राज ने मुस्लिम युवाओं से अपील की कि यदि वे गरबा आयोजन में शामिल होते हैं तो अपनी मां, बहन और बेटियों के साथ जाएं। उन्होंने दूसरे समाज की महिलाओं के साथ गरबा करने से बचने की सलाह भी दी।
उन्होंने कहा कि गरबा में शामिल होने वालों को आयोजन की धार्मिक परंपराओं और नियमों का सम्मान करना चाहिए। साथ ही आयोजन समिति से अनुमति लेने और वहां की परंपराओं के प्रति सम्मान रखने की बात कही।
पूजा, तिलक और कलावा पर भी कही बात
सलीम राज के मुताबिक, गरबा में शामिल होने से पहले वहां की धार्मिक परंपराओं को समझना जरूरी है। उन्होंने पूजा, तिलक और कलावा जैसी परंपराओं के प्रति भी सम्मान का भाव रखने की बात कही।
पहचान छिपाकर एंट्री पर FIR की मांग
गरबा पंडालों में पहचान छिपाकर या गलत नाम से प्रवेश करने के मामलों को लेकर भी सलीम राज ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि किसी को भी अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर धार्मिक आयोजन में प्रवेश नहीं करना चाहिए। उन्होंने ऐसे मामले सामने आने पर पुलिस में FIR दर्ज कराने की मांग की।
आयोजकों से ID जांच और सुरक्षा बढ़ाने की अपील
वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने गरबा आयोजन समितियों से प्रवेश द्वार पर ID जांच और पहचान सत्यापन की व्यवस्था मजबूत करने की अपील की। उनका कहना है कि इससे विवाद और कानून-व्यवस्था से जुड़ी संभावित परिस्थितियों को रोकने में मदद मिल सकती है। उन्होंने गरबा आयोजनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सतर्कता बरतने की बात कही।
‘लव जिहाद’ और छेड़छाड़ का भी किया उल्लेख
सलीम राज ने अपने बयान में ‘लव जिहाद’ और छेड़छाड़ से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। हालांकि, इनसे जुड़े दावों को आरोप/चिंता के रूप में ही देखा जाना चाहिए। किसी भी मामले में कार्रवाई वास्तविक शिकायत, पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होनी चाहिए।
नवरात्रि से पहले सलीम राज की इस अपील के बाद गरबा आयोजनों में धार्मिक परंपरा, पहचान सत्यापन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

