नई दिल्ली, 01 जनवरी। Tobacco Tax : केंद्र सरकार ने तंबाकू उत्पादों पर एक्स्ट्रा एक्साइज ड्यूटी और नया सेस लगाने का बड़ा फैसला लिया है। यह नया कर ढांचा 1 फरवरी 2026 से पूरे देश में लागू होगा। इसके लागू होते ही सिगरेट, चबाने वाला तंबाकू, जर्दा, गुटखा और पान मसाला की कीमतों में भारी बढ़ोतरी तय मानी जा रही है। वित्त मंत्रालय ने इन बदलावों को 31 दिसंबर की देर रात अधिसूचित कर दिया है।
40% GST के ऊपर अब एक्स्ट्रा ड्यूटी और नया सेस
सरकार ने स्पष्ट किया है कि तंबाकू और उससे जुड़े उत्पादों पर पहले से लागू 40 फीसदी GST के अलावा अब एडिशनल एक्साइज ड्यूटी और हेल्थ व नेशनल सिक्योरिटी सेस लागू किया जाएगा। पुराने कंपनसेशन सेस को खत्म कर उसकी जगह यह नया ढांचा लाया जा रहा है। दिसंबर 2025 में ही इससे जुड़े दोनों विधेयकों को संसद की मंजूरी मिल चुकी थी।
सिगरेट पर कितना बढ़ेगा टैक्स?
नए नियमों के मुताबिक, सिगरेट की लंबाई के आधार पर हर 1000 स्टिक्स पर 2,050 रुपये से लेकर 8,500 रुपये तक एक्साइज ड्यूटी लगेगी। इसके ऊपर 40 फीसदी GST भी देना होगा। इसका सीधा असर यह होगा कि कई ब्रांड्स की कीमतें लगभग दोगुनी हो सकती हैं। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य तंबाकू उत्पादों पर टैक्स व्यवस्था को और सख्त बनाना है।
बीड़ी पर राहत, पान मसाला यूनिट्स पर सख्ती
जहां सिगरेट और पान मसाला पर 40% GST लागू रहेगा, वहीं बीड़ी पर टैक्स 18% ही रखा गया है। इसके साथ ही पान मसाला मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स पर नया हेल्थ और नेशनल सिक्योरिटी सेस लगाया जाएगा। यह सेस पैकिंग मशीनों की क्षमता के आधार पर वसूला जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कदम टैक्स चोरी रोकने के लिए उठाया गया है।
पैक्ड तंबाकू पर कसा शिकंजा
नए नियमों के तहत पैकिंग मशीनों से बने और पाउच में पैक किए गए चबाने वाला तंबाकू, जर्दा सुगंधित तंबाकू, गुटखा
को केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम की धारा 3A के तहत नोटिफाई किया गया है, जिससे इन पर सीधी निगरानी और टैक्स वसूली आसान होगी।
शेयर बाजार में मचा हड़कंप
सरकार के इस फैसले का असर शेयर बाजार पर भी तुरंत दिखा। ITC का शेयर 8.62% गिरकर 402 रुपये से 368 रुपये पर आ गया। गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया के शेयरों में 12% तक की गिरावट दर्ज की गई। FMCG इंडेक्स भी करीब 3% टूट गया।
सरकार का कहना है कि इस फैसले का मकसद, तंबाकू उत्पादों की खपत को हतोत्साहित करना। स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता देना। टैक्स चोरी पर लगाम लगाना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संसाधनों को मजबूत करना है।
कुल मिलाकर, 1 फरवरी 2026 से तंबाकू उत्पादों पर टैक्स का बोझ इतना बढ़ जाएगा कि इसका सीधा असर उपभोक्ताओं, उद्योग और बाजा, तीनों पर साफ दिखाई देगा।

