रायपुर, 12 जून। Chhattisgarh Liquor Revenue : छत्तीसगढ़ में शराब कारोबार राज्य सरकार के लिए राजस्व का सबसे बड़ा स्रोत बनता जा रहा है। आबकारी विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान शराब की बिक्री से सरकार को ₹10,751 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है। यह आंकड़ा न केवल राज्य की आय में शराब कारोबार की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है, बल्कि आबकारी विभाग के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
आंकड़ों के अनुसार बढ़ती मांग को देखते हुए राज्य में पिछले एक वर्ष के दौरान 29 नई सरकारी शराब दुकानें खोली गई हैं। इसके साथ ही प्रदेश में सरकारी शराब दुकानों की कुल संख्या बढ़कर 703 हो गई है। वहीं शहरी क्षेत्रों और क्लब संस्कृति को देखते हुए राज्य में 205 क्लब और बार भी संचालित हो रहे हैं।
शराब की उपलब्धता और आपूर्ति बनाए रखने के लिए छत्तीसगढ़ में देसी और विदेशी मदिरा के उत्पादन हेतु 14 डिस्टिलरी पंजीकृत हैं, जो बड़े स्तर पर उत्पादन कर रही हैं। आबकारी विभाग का कहना है कि व्यवस्थित आपूर्ति और बढ़ती मांग के चलते राजस्व संग्रह में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में मिले ₹10,751 करोड़ के राजस्व से उत्साहित आबकारी विभाग ने आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए तैयारी शुरू कर दी है। विभाग को उम्मीद है कि अगले वर्ष राजस्व लक्ष्य में करीब 10 प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि दर्ज की जा सकती है। इससे राज्य की वित्तीय स्थिति को और मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है।
3 साल का तुलनात्मक डेटा
| वित्तीय वर्ष | आबकारी/शराब राजस्व (₹ करोड़ में) |
|---|---|
| 2022-23 | 6,783 करोड़ |
| 2023-24 | 8,500 करोड़ (संशोधित अनुमान) |
| 2024-25 | 11,000 करोड़ (बजट अनुमान) |
| 2025-26 | 10,751 करोड़ (विभागीय प्राप्ति) |
आंकड़े बताते हैं कि छत्तीसगढ़ में आबकारी राजस्व पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है। वर्ष 2022-23 में जहां राज्य को आबकारी मद से 6,783 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर 8,500 करोड़ रुपये पहुंच गया। इसके बाद 2024-25 के लिए 11,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया था और 2025-26 में विभाग ने 10,751 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया।
पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो छत्तीसगढ़ में शराब से होने वाली सरकारी कमाई में लगातार उछाल दर्ज किया गया है। 2022-23 में 6,783 करोड़ रुपये से बढ़कर यह आंकड़ा 2025-26 में 10,751 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, यानी करीब 4 हजार करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है।

