नई दिल्ली, 24 जुलाई। Paper Leak Bill : पेपर लीक विवाद से घिरी मोदी सरकार ने शुक्रवार को एक साथ दो बड़े कदम उठाकर साफ संदेश दिया कि अब परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी और छात्रों की नाराजगी, दोनों से एक साथ निपटा जाएगा। एक ओर कैबिनेट ने पेपर लीक पर देश का सबसे सख्त कानून लाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया, तो दूसरी ओर आंदोलन कर रहे छात्रों के प्रतिनिधियों से बातचीत की शुरुआत भी कर दी।
प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक को लेकर जारी विवाद और छात्रों के आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने शुक्रवार को दो बड़े मोर्चों पर एक साथ कार्रवाई की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में संशोधित पेपर लीक विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी गई। वहीं दूसरी ओर आंदोलनरत CJP के प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के मंत्रियों के बीच कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में अहम वार्ता भी हुई।
सरकार अगले सप्ताह मानसून सत्र में संशोधित Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act से जुड़े विधेयक को संसद में पेश करने की तैयारी कर रही है।
नए कानून में क्या होगा?
- पेपर लीक मामलों के लिए स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट।
- 3 महीने के भीतर जांच और फैसला।
- दोषियों के लिए 10 साल तक की सजा।
- ₹10 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान।
- पेपर लीक माफिया पर कड़ी कानूनी कार्रवाई।
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि ‘पेपर लीक कोई मामूली मामला नहीं है’ और सरकार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कठोर कानून लाएगी।
CJP के साथ बातचीत
इधर, आंदोलनरत CJP के प्रतिनिधियों ने सरकार के साथ तटस्थ स्थान पर बातचीत की। बैठक में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने और आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने जैसी मांगें उठाई गईं। सरकार का कहना है कि वह संवाद और सख्त कानून, दोनों के जरिए परीक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है।

