मुंबई, 16 अप्रैल। Ashok Kharat Case : मुंबई में चर्चित बाबा अशोक खरात मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की नेता और महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रूपाली चाकणकर ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद और मानहानिकारक बताया है।
मंगलवार को जारी बयान में चाकणकर ने कहा कि पिछले 28 दिनों से उनके और उनके परिवार के खिलाफ एक सोची-समझी साजिश के तहत झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य केवल उनकी छवि खराब करना है।
उन्होंने साफ कहा कि अब तक उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है, बावजूद इसके मीडिया और कुछ लोग लगातार आरोपों को हवा दे रहे हैं।
ED और पुलिस की जांच जारी
गौरतलब है कि स्वयंभू बाबा अशोक खरात इस समय पुलिस हिरासत में है और उसके खिलाफ यौन उत्पीड़न और धोखाधड़ी जैसे गंभीर मामलों की जांच चल रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रहा है और कई ठिकानों पर छापेमारी कर चुका है।
वीडियो विवाद के बाद बढ़ा दबाव
इस पूरे विवाद के बीच चाकणकर को पिछले महीने महिला आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा था। कुछ वीडियो सामने आए थे, जिनमें वह खरात के पैर धोती नजर आई थीं, जिसके बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में विवाद बढ़ गया।
परिवार तक पहुंची जांच
जांच एजेंसियों ने मामले में चाकणकर के परिवार को भी शामिल करते हुए उनकी बहन से पूछताछ की है। यह जांच की जा रही है कि कहीं उनके बैंक खातों का इस्तेमाल किसी संदिग्ध लेन-देन में तो नहीं हुआ।
गुमनाम पत्र पर उठाए सवाल
चाकणकर ने इस पूरे विवाद की जड़ माने जा रहे एक गुमनाम पत्र पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बिना किसी नाम और पते वाले पत्र को आधार बनाकर आरोप लगाना दुर्भावनापूर्ण है और इसकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने पुलिस अधिकारियों के हवाले से कहा कि इस तरह के गुमनाम पत्र कानूनी रूप से मान्य नहीं होते और इन्हें गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए।
सच्चाई सामने आएगी
रूपाली चाकणकर ने दोहराया कि उनका या उनके परिवार का इस मामले में किसी भी तरह का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उन्होंने विश्वास जताया कि जांच पूरी होने के बाद सच्चाई सामने आएगी और उन्हें न्याय मिलेगा।

