Caste Certificate Case : BJP विधायक रामकुमार टोप्पो को बड़ी राहत…! जाति प्रमाण पत्र पर जांच समिति की क्लीन चिट…High Court के निर्देश के बाद आया फैसला

Caste Certificate Case : BJP विधायक रामकुमार टोप्पो को बड़ी राहत…! जाति प्रमाण पत्र पर जांच समिति की क्लीन चिट…High Court के निर्देश के बाद आया फैसला

रायपुर/रायगढ़, 30 जुलाई। Caste Certificate Case : उत्तर छत्तीसगढ़ की सीतापुर विधानसभा से भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो को जाति प्रमाण पत्र विवाद में बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट के निर्देश पर रायगढ़ जिला प्रशासन द्वारा गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में विधायक के जाति प्रमाण पत्र को वैध और सही माना है। समिति ने कहा कि शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेजी या प्रमाणिक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके, इसलिए शिकायत को निराधार मानते हुए प्रकरण का निराकरण कर दिया गया।

जांच में मिली क्लीन चिट

समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। सभी उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच के बाद समिति ने विधायक रामकुमार टोप्पो के जाति प्रमाण पत्र को सही ठहराया।

रामकुमार टोप्पो बोले- ‘सच्चाई की जीत हुई’

रिपोर्ट सामने आने के बाद विधायक रामकुमार टोप्पो ने कहा कि उन्होंने जांच प्रक्रिया में प्रशासन का पूरा सहयोग किया और उन्हें शुरू से भरोसा था कि सच्चाई सामने आएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधियों ने उन्हें बदनाम करने के उद्देश्य से यह विवाद खड़ा किया था, लेकिन जांच ने सभी आरोपों को गलत साबित कर दिया।

हाई कोर्ट ने दिए थे 90 दिन में फैसला करने के निर्देश

इस मामले में बिलासपुर हाई कोर्ट ने रायगढ़ कलेक्टर और जिला स्तरीय सत्यापन समिति को 90 दिनों के भीतर जांच पूरी कर अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया था। इसके बाद समिति ने जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।

क्या था पूरा मामला?

याचिकाकर्ता बिहारी लाल तिर्की ने 2023 विधानसभा चुनाव के दौरान विधायक रामकुमार टोप्पो के जाति प्रमाण पत्र पर आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि प्रमाण पत्र जारी करने में नियमों का पालन नहीं किया गया और बिना आवश्यक प्रक्रिया के दस्तावेज जारी किए गए। मामला जिला स्तरीय समिति में लंबित रहने के बाद हाई कोर्ट पहुंचा था।

याचिकाकर्ता ने क्या लगाए थे आरोप?

बिहारी लाल तिर्की का दावा था कि विधायक के पिता गणेश राम वर्ष 1980 में झारखंड से छत्तीसगढ़ आए थे और उनके नाम पर यहां कोई जमीन दर्ज नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि जाति प्रमाण पत्र जारी करने में सरलीकरण नियमों और सेटलमेंट प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

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